तेलंगाना पुलिस पर दाग! सोना गिरवी, सर्विस पिस्टल गायब—SI भानु प्रकाश के काले कारनामों की परत-दर-परत जांच

हैदराबाद के अंबरपेट पुलिस स्टेशन में कार्यरत सब-इंस्पेक्टर भानु प्रकाश पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप अब पुलिस महकमे के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं. मामला केवल चार तोले सोने की बरामदगी में हेराफेरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी 9MM सर्विस पिस्टल के गायब होने ने जांच को और गंभीर मोड़ दे दिया है. शुरुआती पड़ताल में खुलासा हुआ है कि चोरी के एक केस में जब्त सोना पीड़ित पक्ष को लौटाने के बजाय SI ने खुद अपने पास रख लिया और बाद में उसे गिरवी रखकर बड़ी रकम हासिल कर ली. आरोप है कि सोने को देसी अंडों की दुकानों, ज्वैलर्स और अन्य नेटवर्क के जरिए खपाने के लिए योजना बनाई गई थी, ताकि किसी को शक न हो.
भानु प्रकाश 2020 बैच के अधिकारी हैं और कटघर थाने में तैनाती के दौरान उन्होंने एक चोरी के केस में 45,360 रंगे हुए और 35,640 सफेद अंडों के गोदाम पर जांच की चर्चा का इस्तेमाल उदाहरण के तौर पर विभाग में अपनी “तेज़ कार्रवाई” की छवि बनाने के लिए किया था. लेकिन अंबरपेट में 4 तोले (40 ग्राम के करीब) सोने की बरामदगी वाले केस में उन्होंने लोक अदालत का सहारा लेकर दोनों पक्षों से समझौता कराया और केस बंद भी करवा दिया, पर सोना नहीं लौटाया. पीड़ितों के लगातार चक्कर लगाने और टालमटोल से शक गहराया, तो आला अफसरों ने पूछताछ शुरू की.
CCTV फुटेज की जांच में साफ नजर आया कि थाने के ड्रावर में सोना खुद भानु प्रकाश ने रखा और कुछ दिन बाद वही पैकेट निकालकर ले जाते भी दिखे. जब ड्रावर की तलाशी ली गई, तो वहां सोना गायब मिला, जबकि अलग कोने में सर्विस पिस्टल की सिर्फ जिंदा कारतूस रखी मिलीं. पिस्टल का कोई रिकॉर्ड, जमा-वापसी की एंट्री या मूवमेंट लॉग मौजूद नहीं था. पूछे जाने पर SI ने कहा कि पिस्टल “ड्रावर में ही थी, कैसे गायब हुई—उन्हें नहीं पता.” यह जवाब जांचकर्ताओं को संतुष्ट नहीं कर पाया.
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, SI की निजी जिंदगी से जुड़े कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए. सूत्रों के मुताबिक, भानु प्रकाश को ऑनलाइन बेटिंग की लत थी, जिसमें वे अब तक लगभग ₹70 लाख की रकम हार चुके थे. कर्ज का दबाव इतना बढ़ा कि वे सोना गिरवी रखने, थाने के सामान में हेराफेरी और संभावित गैर-कानूनी सौदों की राह पर उतर आए. इतना ही नहीं, कुछ दिनों पहले उन्होंने थाने में यह भी दावा किया कि उन्हें आंध्र प्रदेश में ग्रुप-2 स्तर की सरकारी नौकरी मिली है और वे स्टेशन से सामान लेने पहुंचे थे. इसी दौरान पिस्टल गायब होने की बात उजागर हुई.
अब टास्क फोर्स, विभागीय विजिलेंस और स्थानीय पुलिस जांच कर रहे हैं कि क्या यह सरकारी हथियार किसी बाहरी गिरोह, माफिया या सट्टा-नेटवर्क को सौंपा गया. फूड सेफ्टी, लोक अदालत रिकॉर्ड, थाना लॉग और बैंक लेन-देन की डिटेल भी खंगाली जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सबूत पुख्ता होने पर आपराधिक धाराओं में कार्रवाई बढ़ाई जाएगी. फिलहाल SI सस्पेंड हैं और पूछताछ जारी है. यह केस पुलिस प्रणाली में निगरानी, डिजिटल लॉगिंग और हथियार सुरक्षा के प्रोटोकॉल पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है. (शब्द: ~350)





