बारामती एयरपोर्ट की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल, विमान हादसे के बाद सामने आई अव्यवस्थाएं

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे के बाद बारामती एयरपोर्ट की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस एयरपोर्ट पर वीवीआईपी विमानों की लैंडिंग होती है, वहां बुनियादी सुविधाओं और आधुनिक नियंत्रण प्रणाली की कमी सामने आई है।
यह एयरपोर्ट पुणे से करीब 95 किलोमीटर दूर स्थित है और मुख्य रूप से फ्लाइट ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। परिसर में दो ट्रेनिंग एकेडमी संचालित होती हैं, जहां से उड़ान भरने वाले विमानों के साथ पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि, पहले की घटनाओं में किसी की जान नहीं गई थी।
महाराष्ट्र एयरपोर्ट्स डेवलपमेंट कंपनी के अनुसार, बारामती राज्य के बिना लाइसेंस वाले घरेलू एयरपोर्ट्स में शामिल है। यह महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम के अधीन है और इसका संचालन बारामती एयरपोर्ट लिमिटेड द्वारा किया जाता है। एयरपोर्ट पर 7710 फीट लंबा रनवे है, जिसे 1990 के दशक में विकसित किया गया था।
एयरपोर्ट की इमारत में केवल दो केबिन और एक कमरा है। यहां पूर्ण विकसित एयर ट्रैफिक कंट्रोल प्रणाली मौजूद नहीं है। बुनियादी एटीसी व्यवस्था फ्लाइंग स्कूलों के छात्र और प्रशिक्षक संभालते हैं। वीवीआईपी लैंडिंग के दौरान भी यही अस्थायी व्यवस्था लागू की जाती है।
हादसे के समय दृश्यता लगभग तीन किलोमीटर थी, जबकि सुरक्षित लैंडिंग के लिए पांच किलोमीटर दृश्यता आवश्यक मानी जाती है। इसी कारण पायलट ने पहली बार लैंडिंग रद्द की थी। बारामती एयरपोर्ट को अनकंट्रोल्ड एयरोड्रोम की श्रेणी में रखा गया है, जहां आधुनिक रडार और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
विमान दुर्घटना के बाद भारतीय वायुसेना ने एयरपोर्ट पर विशेष टीम तैनात की है, जो अस्थायी रूप से एटीसी और मौसम संबंधी सेवाएं प्रदान कर रही है, ताकि हवाई संचालन सुरक्षित रूप से किया जा सके।
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि रनवे इस हादसे का मुख्य कारण नहीं है, लेकिन अगर एयरपोर्ट पर आधुनिक लैंडिंग सिस्टम और बेहतर तकनीकी सुविधाएं होतीं, तो दुर्घटना को टाला जा सकता था।
इस हादसे के बाद बारामती एयरपोर्ट की स्थिति पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियों पर दबाव बढ़ रहा है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को जल्द से जल्द आधुनिक बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।





