विमान हादसों में देश ने खोए कई बड़े नेता, अजित पवार का निधन बना ताजा उदाहरण

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान हादसे में निधन होने से देश में शोक की लहर है। यह पिछले सात महीनों में किसी बड़े नेता की विमान दुर्घटना में हुई दूसरी मौत है। इससे पहले जून 2025 में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी की भी विमान हादसे में जान चली गई थी।
भारत के इतिहास में अब तक कई प्रमुख नेता विमान या हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें तीन मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। इन घटनाओं ने समय-समय पर देश को गहरे सदमे में डाला है।
सबसे पहले वर्ष 1965 में गुजरात के मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता की विमान दुर्घटना में मृत्यु हुई थी। कच्छ के रण में निरीक्षण के दौरान उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में उनकी पत्नी समेत कई अन्य लोगों की भी मौत हुई थी।
23 जून 1980 को कांग्रेस सांसद संजय गांधी का दिल्ली में विमान उड़ाते समय हादसे में निधन हो गया था। करतब दिखाने के दौरान उनका विमान क्रैश हो गया था, जिसमें उनके साथ मौजूद व्यक्ति की भी जान चली गई थी।
30 सितंबर 2001 को कांग्रेस नेता माधवराव सिंधिया का मैनपुरी के पास विमान दुर्घटना में निधन हुआ था। वे उस समय एक रैली में शामिल होने जा रहे थे।
वर्ष 2002 में लोकसभा अध्यक्ष जी.एम.सी. बालयोगी की हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई थी। आंध्र प्रदेश में कार्यक्रम के लिए जाते समय उनका हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था।
सितंबर 2009 में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. राजशेखर रेड्डी का नल्लामाला क्षेत्र में हेलिकॉप्टर हादसे में निधन हो गया था। इस घटना को लेकर कई तरह की अटकलें भी लगी थीं, हालांकि सरकार ने नक्सली हमले की आशंका को खारिज कर दिया था।
वर्ष 2011 में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री डोरजी खांडू का विमान तवांग से इटानगर जाते समय लापता हो गया था, बाद में दुर्घटना की पुष्टि हुई और उनका निधन हो गया।
12 जून 2025 को अहमदाबाद से उड़ान भरने के बाद एयर इंडिया का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें विजय रुपाणी की मृत्यु हुई थी। वे अपने परिवार से मिलने लंदन जा रहे थे।
अब जनवरी 2026 में अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत ने एक बार फिर देश को झकझोर दिया है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया है और समर्थक बड़ी संख्या में उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने विमान सुरक्षा और वीआईपी यात्राओं की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और संबंधित एजेंसियों से इन हादसों की गहन जांच और भविष्य में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग की जा रही है।





