रायपुर में मिड-डे मील रसोइयों के आंदोलन के दौरान दो महिलाओं की मौत, मांगों को लेकर आक्रोश तेज

राजधानी रायपुर में मिड-डे मील योजना के तहत कार्यरत रसोइयों के आंदोलन के दौरान दो महिला कर्मियों की मौत हो गई। दोनों महिलाएं छत्तीसगढ़ स्कूल मिड-डे मील यूनियन के बैनर तले नवा रायपुर में चल रहे धरने में शामिल थीं और लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही थीं।
आंदोलनकारी रसोइयों के अनुसार, 26 जनवरी की शाम धरने के दौरान दोनों महिलाओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल इलाज के लिए निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मौत के स्पष्ट कारणों की अभी पुष्टि नहीं हो पाई है।
जानकारी के मुताबिक, बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के सालधा गांव की निवासी दुलारी यादव सरकारी प्राथमिक स्कूल में रसोइया के पद पर कार्यरत थीं। आंदोलन के दौरान तबीयत खराब होने के बाद उन्हें पहले अंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया, फिर निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
दूसरी महिला रसोइया रुकमणी सिन्हा बालोद जिले के डोंडी ब्लॉक के कुसुमकासा गांव की रहने वाली थीं। वह भी मिड-डे मील योजना में कार्यरत थीं और आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल थीं। उनकी भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि प्रदेशभर की लगभग 86 हजार रसोइयां पिछले 29 दिसंबर 2025 से न्यूनतम मानदेय, स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। वर्तमान में उन्हें मात्र 66 रुपये प्रतिदिन मानदेय मिलता है, जिसे बढ़ाकर 400 रुपये करने की मांग की जा रही है।
रसोइया संघ की प्रमुख मांगों में मानदेय वृद्धि, सरकार द्वारा किए गए 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के वादे को पूरा करना, स्थायी नियुक्ति, सामाजिक सुरक्षा, ड्रेस कोड लागू करना और बजट में उनकी मांगों को शामिल करना प्रमुख हैं।
दो महिलाओं की मौत के बाद आंदोलनकारी रसोइयों में भारी आक्रोश है। यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार लंबे समय से उनकी मांगों की अनदेखी कर रही है और अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
आंदोलनकारी रसोइयों ने मृतक महिलाओं के परिजनों को उचित मुआवजा देने और सभी लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। घटना के बाद आंदोलन और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।





