क्या था रॉलेट एक्ट, जिसका जिक्र कर बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दिया

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने UGC की नई गाइडलाइन और शंकराचार्य विवाद को लेकर इस्तीफा दिया। उन्होंने नई गाइडलाइन की तुलना 1919 के रॉलेट एक्ट से की और इसे काला कानून बताया। रॉलेट एक्ट को अंग्रेजों ने मार्च 1919 में लागू किया था और इसे अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम भी कहा जाता था।
इस एक्ट के तहत ब्रिटिश सरकार को किसी भी व्यक्ति को आतंकवाद या क्रांतिकारी गतिविधियों के शक में बिना ट्रायल के जेल में डालने और दो साल तक हिरासत में रखने का अधिकार था। यह कानून बोलने और इकट्ठा होने की आजादी पर भी रोक लगाता था। 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर में इस एक्ट के तहत गिरफ्तारी का विरोध कर रही शांतिपूर्ण भीड़ पर ब्रिटिश सैनिकों ने गोलीबारी की, जिसे जलियांवाला बाग हत्याकांड के नाम से जाना जाता है।
महात्मा गांधी और अन्य नेताओं ने रॉलेट एक्ट का विरोध किया और इसे भारतीय नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला माना। 1920 में गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया और 1922 में ब्रिटिश अधिकारियों को रॉलेट एक्ट को रद्द करना पड़ा। इस एक्ट के विरोध ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अंततः 1947 में भारत को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली।
रॉलेट एक्ट की प्रमुख बातें यह थीं कि पुलिस किसी व्यक्ति को बिना वारंट हिरासत में रख सकती थी, तलाशी ले सकती थी और आतंकवादी गतिविधियों के शक में दो साल तक गिरफ्तारी कर सकती थी। देशभर में इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्हें रॉलेट सत्याग्रह कहा गया।





