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दुनियाभर में बढ़ता प्लास्टिक संकट, 2040 तक बीमारियों के दोगुने होने का खतरा: अध्ययन

दुनियाभर में प्लास्टिक का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसका सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि अगर मौजूदा रुझान जारी रहा, तो वर्ष 2040 तक बीमारियों का खतरा दोगुना हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, प्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र के दौरान निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें, वायु प्रदूषक कण और जहरीले रसायन मानव स्वास्थ्य को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रहे हैं। इनसे कैंसर, सांस संबंधी रोग और अन्य खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान प्लास्टिक के उत्पादन और खुले में जलाने से हो रहा है।

अध्ययन में बताया गया है कि प्लास्टिक सिस्टम से होने वाले उत्सर्जन का असर 2040 तक वर्ष 2016 की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि प्लास्टिक उत्पादन पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो पर्यावरण और स्वास्थ्य पर इसका बोझ और बढ़ेगा।

शोध में यह भी सामने आया है कि प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभावों को अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है, लेकिन इसके खतरे लगातार सामने आ रहे हैं। प्लास्टिक की रासायनिक संरचना को लेकर पर्याप्त जानकारी न होना प्रभावी नीतियां बनाने में बड़ी बाधा बन रहा है।

रिपोर्ट में प्लास्टिक उत्पादों के पूरे जीवनचक्र, जैसे कच्चे माल का निष्कर्षण, उत्पादन, उपयोग, कचरा प्रबंधन, रीसाइक्लिंग और खुले में जलाने से होने वाले नुकसान को शामिल किया गया है। इन सभी चरणों में प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ते हैं।

शोधकर्ताओं ने वर्जिन प्लास्टिक के उत्पादन में भारी कमी लाने की सिफारिश की है। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर समन्वित नीति बनाकर गैर-जरूरी प्लास्टिक के इस्तेमाल को नियंत्रित करना जरूरी है। इससे प्रदूषण और उससे जुड़ी बीमारियों को कम किया जा सकता है।

अध्ययन में यह भी बताया गया है कि प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए कई देश ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी पर सहमति जता चुके हैं। इस समझौते का उद्देश्य प्लास्टिक उत्पादन और कचरे को नियंत्रित कर मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा करना है।

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