‘Gandhi Parivar’ का संकट खत्म: 14 दिन बाद सुरक्षित लौटे कैरव गांधी

जमशेदपुर। झारखंड के जमशेदपुर में मंगलवार, 27 जनवरी की सुबह गांधी परिवार के लिए राहत और खुशी लेकर आई। पिछले 14 दिनों से अपहरणकर्ताओं के चंगुल में फंसे युवा उद्योगपति कैरव गांधी (24 वर्ष) तड़के करीब 4:30 बजे सुरक्षित अपने घर लौट आए। पुलिस की विशेष टीम उन्हें सर्किट हाउस एरिया स्थित उनके आवास तक लेकर पहुंची। बेटे की सकुशल वापसी के साथ ही गांधी परिवार के घर में दो सप्ताह से छाया सन्नाटा अब मुस्कान और सुकून में बदल गया है।
कैरव की सुरक्षित वापसी पर उनके पिता और प्रतिष्ठित व्यवसायी देवांग गांधी भावुक हो गए। उन्होंने ईश्वर, पुलिस प्रशासन और शहरवासियों का आभार जताते हुए कहा कि दुआओं और लोगों के समर्थन ने उनके बेटे की जान बचाई। उन्होंने कहा, “इन कठिन दिनों में जो लोग हमारे साथ चट्टान की तरह खड़े रहे, हम उनके सदैव ऋणी रहेंगे।”
इस हाई-प्रोफाइल अपहरण कांड को सुलझाने के लिए एसएसपी के नेतृत्व में 7 विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए थे। जांच का दायरा झारखंड के चांडिल से निकलकर बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक फैला। सूत्रों के अनुसार, अपहरणकर्ताओं ने इंडोनेशियाई नंबर से 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी, जिससे यह मामला तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया था। बावजूद इसके, तकनीकी सर्विलांस और ह्यूमन इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस ने लगातार दबाव बनाया।
लगातार छापेमारी और बढ़ती दबिश से घबराकर आखिरकार अपहरणकर्ताओं को पीछे हटना पड़ा। सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष मानव केडिया ने पुलिस के साहस और रणनीति को सलाम करते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने एसएसपी, सिटी एसपी और ग्रामीण एसपी की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।
चैंबर ने शहरवासियों से अपील की है कि गांधी परिवार की निजता का सम्मान करें, क्योंकि वे मानसिक आघात से उबरने की प्रक्रिया में हैं। वहीं, पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘ऑपरेशन कैरव’ से जुड़े सभी पहलुओं का खुलासा किया जाएगा।





