धान खरीदी में हाहाकार, टोकन संकट से किसान परेशान- सड़क से दफ्तर तक भटकने को मजबूर

बिलासपुर। जिले में धान खरीदी को लेकर किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। सरकार और प्रशासन की बार-बार बदलती नीतियां अब किसानों के लिए सिरदर्द बन गई हैं। खरीफ सीजन 2025–26 की शुरुआत में यह भरोसा दिलाया गया था कि किसानों का एक-एक दाना धान खरीदा जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है।

धान खरीदी अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है, इसके बावजूद कई किसान आज भी अपनी फसल बेचने के लिए भटकने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि एग्रीस्टेट पोर्टल में रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण उनकी टोकन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। रोजाना वे अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान की जगह सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।

किसानों ने मीडिया के सामने बताया कि अब उनसे कहा जा रहा है कि उनके कागजात रायपुर भेजे गए हैं और वहीं से आगे की प्रक्रिया होगी। सवाल यह है कि जब धान खरीदी में महज पांच दिन शेष हैं, तो ये कागजात कब वापस आएंगे और किसान कब अपनी मेहनत की फसल बेच पाएंगे।

एक किसान ने भावुक होकर कहा कि अगर उनकी खून-पसीने की कमाई नहीं बिकी, तो उनके सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो जाएगा। यह बयान किसानों की पीड़ा को साफ तौर पर बयां करता है और प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी भी है।

वहीं, इस पूरे मामले पर जिला खाद्य अधिकारी अमित कुजूर ने बताया कि जिले में अब तक लगभग 88 प्रतिशत धान की खरीदी हो चुकी है और 31 जनवरी की अंतिम तिथि तक 97 प्रतिशत किसानों की टोकन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। उन्होंने दावा किया कि हर पात्र और इच्छुक किसान की धान खरीदी की जाएगी और जो छोटी-मोटी दिक्कतें आ रही हैं, उनका समाधान किया जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बचे हुए किसानों की धान खरीदी अंतिम दिनों में हो पाएगी, या फिर सरकारी दावे एक बार फिर फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?

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