शादी के सिर्फ 65 दिन, 13 साल लंबा विवाद और अब सुप्रीम कोर्ट ने दिया तलाक

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में 65 दिन चली शादी को खत्म करते हुए दंपति को तलाक दे दिया। यह मामला विशेष इसलिए है क्योंकि दंपति के बीच विवाद इतना गहरा था कि तलाक के लिए उन्हें 13 साल तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान दोनों एक-दूसरे के खिलाफ 40 से अधिक कानूनी मामलों में उलझे रहे। कोर्ट ने कहा कि रिश्ते पूरी तरह से टूट चुके हैं और संभवतः दोनों एक-दूसरे के लिए बने ही नहीं थे।
जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दंपति के लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद को समाप्त किया। बेंच ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट इतनी बढ़ गई थी कि अब सुलह संभव नहीं थी।
कोर्ट ने पाया कि यह शादी 28 जनवरी, 2012 को हुई थी, लेकिन पत्नी 65 दिनों के भीतर ही पति और उसके परिवार पर क्रूरता का आरोप लगाकर मायके चली गई। इसके बाद दोनों अलग हो गए और दिल्ली, प्रयागराज, गाजियाबाद और लखनऊ की कई अदालतों में लगातार केसों में उलझे रहे।
पत्नी ने बिना गुजारा भत्ता की मांग किए सुप्रीम कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की और लंबित आपराधिक और सिविल मामलों को समाप्त करने का अनुरोध किया। पति ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पत्नी ने उसकी जिंदगी बर्बाद की और झूठी गवाही देने के आरोप में केस दर्ज किए।
कोर्ट ने कहा कि बिखरी हुई शादी को फिर से जोड़ना संभव नहीं और दोनों शायद एक-दूसरे के लिए बने ही नहीं थे। कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि सभी लंबित मामलों को सुलझाया जाएगा और दंपति को अब वैवाहिक विवाद से जुड़े नए मामले दाखिल करने से रोका गया। साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जो सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन में जमा किया जाएगा।





