खैरागढ़ में वनाग्नि रोकथाम पर बड़ी कार्यशाला, गर्मी से पहले पूरी तैयारी के निर्देश

खैरागढ़। जंगलों में लगने वाली आग को रोकने और समय रहते उस पर काबू पाने के उद्देश्य से खैरागढ़ में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह बैठक इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में संपन्न हुई, जिसमें दुर्ग वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के कलेक्टर सहित कई जिलों के वन अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।
बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि गर्मी के मौसम में जंगलों में आग की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं, इसलिए पहले से पूरी तैयारी करना बेहद जरूरी है। निर्देश दिए गए कि आग लगने से पहले जंगलों में फायर लाइन बनाई जाए, संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों ने बताया कि जंगलों में आग लगने के कई कारण होते हैं। महुआ बीनने के दौरान आग लगना, खेत और बाड़ी साफ करने में लापरवाही, पिकनिक के समय आग जलाना, बीड़ी-सिगरेट फेंकना, बिजली के तारों से चिंगारी निकलना और होली के दौरान लापरवाही इसके प्रमुख कारण हैं। इन सभी कारणों पर नियंत्रण और लोगों को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में यह भी बताया गया कि जंगल की आग से पेड़-पौधों को भारी नुकसान होता है, जमीन की नमी कम हो जाती है और पर्यावरण संतुलन बिगड़ता है। इसलिए आग लगते ही उसे तुरंत बुझाना जरूरी है। इसके लिए कंट्रोल रूम बनाने, अस्थायी केंद्र तैयार रखने और जरूरी उपकरण पहले से उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए। वन सुरक्षा कर्मियों को टॉर्च, जूते, पानी की बोतल, फायर ब्लोअर जैसे आवश्यक संसाधन देने की बात भी कही गई।
इसके साथ ही गांवों, हाट-बाजारों और स्कूलों में पोस्टर, प्रतियोगिताएं और नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जंगल की आग रोकने में सिर्फ वन विभाग ही नहीं, बल्कि राजस्व विभाग, पुलिस, दमकल विभाग और पंचायतों का सहयोग भी जरूरी है।

अंत में सभी अधिकारियों से अपील की गई कि वे पूरी जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ काम करें, ताकि आने वाले समय में जंगलों को आग से सुरक्षित रखा जा सके।





