सुशासन तिहार की जमीनी हकीकत उजागर, जनदर्शन में उमड़ी भारी भीड़

बिलासपुर में मंगलवार को आयोजित जनदर्शन में उमड़ी भारी भीड़ ने सुशासन तिहार के सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और प्रशासन द्वारा यह दावा किया जा रहा है कि सुशासन तिहार के माध्यम से गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है, लेकिन जनदर्शन में पहुंचे सैकड़ों लोगों की भीड़ कुछ और ही कहानी बयां कर रही थी।
दूर-दराज के इलाकों से लोग अपनी समस्याएं लेकर जनदर्शन पहुंचे। इससे साफ जाहिर होता है कि कई मामलों में लोगों की परेशानियां अब भी जस की तस बनी हुई हैं। जनदर्शन में पहुंचे दर्राभाटा निवासी एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसके गांव में मकान टैक्स के नाम पर उससे 16 हजार रुपये की मांग की जा रही है। पीड़ित ने इसे मनमानी बताते हुए संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की।
वहीं एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि वह पिछले 30 वर्षों से अपने मकान में रह रहा था, बावजूद इसके बिना किसी सूचना और नोटिस के उसका घर तोड़ दिया गया। इसी तरह कोटा क्षेत्र से आई एक महिला ने रोते हुए बताया कि पंचायत के लोगों ने बिना जानकारी दिए उसका मकान गिरा दिया। महिला ने मामले की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
जनदर्शन में सामने आई इन शिकायतों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर सुशासन तिहार में ही समस्याओं का समाधान हो रहा है, तो फिर हर मंगलवार जनदर्शन में इतनी बड़ी संख्या में लोग क्यों पहुंच रहे हैं।
इस पूरे मामले पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि जनदर्शन में आई सभी शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित विभागों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ समस्याएं ऐसी होती हैं जिनका तुरंत समाधान संभव नहीं होता, लेकिन प्रशासन प्रयासरत है।
कुल मिलाकर, मंगलवार का जनदर्शन एक बार फिर यह दर्शाता है कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अब भी बड़ा अंतर बना हुआ है। अब देखना होगा कि सुशासन तिहार वास्तव में लोगों की समस्याओं को कितना दूर कर पाता है।





