Master Plan To Save Groundwater: भूजल बचाने सरकार का मास्टर प्लान, धान के मोह से बाहर आएगा किसान
रबी में धान पर ब्रेक, दलहन-तिलहन को ग्रीन सिग्नल

अब धान के मोह को छोड़ने का समय आ गया है। (Master Plan To Save Groundwater) भूजल स्तर बचाने और रबी सीजन में धान की खेती से हो रहे नुकसान को रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार अब किसानों को धान के बजाय दलहन और तिलहन फसलों की ओर मोड़ना चाहती है, ताकि पानी की बचत हो और किसानों की आमदनी भी सुरक्षित रहे।
सरकार का मास्टर प्लान
दरअसल, रबी सीजन में धान की खेती के लिए अत्यधिक पानी की जरूरत होती है। यही वजह है कि कई इलाकों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है और डार्क जोन की स्थिति बनती जा रही है। इस खतरे को देखते हुए सरकार ने नई योजना तैयार की है, जिसके तहत किसानों को तुअर, मूंग, उड़द, सोयाबीन और मूंगफली जैसी फसलों को उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार की ओर से इन फसलों के बीज सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, वहीं सबसे अहम बात यह है कि अब इन दलहन और तिलहन फसलों की सरकारी खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर की जाएगी।
धान छोड़ो, भविष्य बचाओ-सरकार का बड़ा फैसला, (Master Plan To Save Groundwater)
इससे किसानों को बाजार के जोखिम से राहत मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, दलहन और तिलहन की फसलों को धान की तुलना में करीब 70 प्रतिशत कम पानी की आवश्यकता होती है। इतना ही नहीं, ये फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं और जमीन को अगली फसलों के लिए तैयार करती हैं। सरकार का लक्ष्य है कि धान का रकबा घटाकर दलहन और तिलहन के रकबे में कम से कम 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए।
साथ ही, स्थानीय स्तर पर खरीदी केंद्र खुलने से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और किसानों को उनकी फसल का पूरा पैसा सीधे बैंक खाते में मिलेगा। यह फैसला न केवल भूजल संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और छत्तीसगढ़ को दलहन–तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत पहल भी है।





