नकली नोट मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 5 साल की सजा रद्द

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नकली नोट के एक पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई 5 साल की कठोर कारावास की सजा को रद्द कर दिया है। सबूतों के अभाव में कोर्ट ने आरोपी सदानंद दास को सभी आरोपों से बरी कर दिया।
न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आपराधिक मंशा (मेनस रिया) साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है। कोर्ट ने कहा कि केवल नकली नोट का होना तब तक अपराध नहीं माना जा सकता, जब तक यह साबित न हो जाए कि आरोपी को उसके नकली होने की जानकारी थी।
मामला 19 नवंबर 2014 का है। सारंगढ़ के डोंगरीपाली स्थित एक शराब दुकान में 1000 रुपये का संदिग्ध नोट चलाने के आरोप में नित्यानंद चातर और सदानंद दास को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद जून 2015 में ट्रायल कोर्ट ने दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 489-बी और 34 के तहत दोषी ठहराते हुए 5 साल की सजा सुनाई थी।
इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। अपील के दौरान एक आरोपी नित्यानंद चातर की मृत्यु हो गई, जबकि सदानंद दास के मामले में सुनवाई जारी रही। हाईकोर्ट ने पाया कि मामले के सभी मुख्य गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे और ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी को नोट के नकली होने की पहले से जानकारी थी।
सुप्रीम कोर्ट के उमाशंकर बनाम राज्य मामले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जानकारी या विश्वास के बिना नकली नोट का होना अपराध नहीं माना जा सकता। अंततः सबूतों की कमी के चलते हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला निरस्त करते हुए सदानंद दास को बरी कर दिया।





