बस्तर में किसानों की मेहनत पर पानी: संग्रहण केंद्रों में सड़ रहा करोड़ों का धान

जगदलपुर। किसानों की कड़ी मेहनत से पैदा हुआ धान अब बारिश और सरकारी लापरवाही की वजह से खराब हो रहा है। बस्तर जिले में खरीदी के करीब एक साल बाद भी 27 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा धान संग्रहण केंद्रों में पड़ा हुआ है, जिसका समय पर उठाव नहीं हो सका। इसका नतीजा यह हुआ कि करोड़ों रुपये का धान सड़ने लगा है।
जगदलपुर के नियानार संग्रहण केंद्र में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां बड़ी मात्रा में धान पूरी तरह सड़ चुका है। धान काला पड़ गया है और उसे रखने वाले बोरे भी गल गए हैं। अब मिलर्स सड़े हुए बोरों से धान निकालकर नए बोरों में भर रहे हैं। उठाव की आखिरी तारीख 31 जनवरी तय है, लेकिन केंद्र में रखे करीब 15 हजार मीट्रिक टन धान का समय पर उठाव होना मुश्किल नजर आ रहा है।

स्थिति सिर्फ बस्तर तक सीमित नहीं है। कवर्धा में करीब 7 करोड़ रुपये का धान चूहों के खाने की बात सामने आई है, जबकि दंतेवाड़ा जिले में भी हजारों क्विंटल चावल खराब होने की जानकारी मिली है। इससे साफ है कि धान के भंडारण और उठाव में गंभीर लापरवाही हो रही है।


संग्रहण केंद्र में मौजूद मिलर्स प्रतिनिधि ने बताया कि समय पर डीओ जारी नहीं होने और खराब गुणवत्ता की त्रिपाल की वजह से धान खराब हुआ। उनका कहना है कि इस धान से बना चावल राशन दुकानों तक पहुंचने लायक नहीं है और इससे लोगों की सेहत को खतरा हो सकता है।
वहीं मजदूर संघ का कहना है कि शासन-प्रशासन की लापरवाही से किसानों की मेहनत बर्बाद हो रही है। मजदूरों को डर है कि खराब धान से बना चावल आम लोगों तक पहुंच सकता है, जो गंभीर बीमारी की वजह बन सकता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर सीपी बघेल ने संग्रहण केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने माना कि धान खराब हुआ है और इसकी जांच के लिए एक टीम बनाई जाएगी। जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि इतनी बड़ी लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे बड़ा घोटाला बताया है। उनका कहना है कि अगर पूरे प्रदेश के संग्रहण केंद्रों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो करोड़ों रुपये के घोटाले सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन अगर हर साल किसानों का धान इसी तरह सड़ता रहा, तो इसका नुकसान किसान और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ेगा।





