बदहाली का शिकार स्मृति वाटिका, सांसद-विधायक के निरीक्षण से जगी उम्मीद

बिलासपुर। वर्ष 2002 में बनाई गई स्मृति वाटिका आज बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है। कभी हरियाली और सुकून का केंद्र रही यह वाटिका अब जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। हालात ऐसे हैं कि यहां धीरे-धीरे बेजा कब्जा भी शुरू हो गया है।

स्मृति वाटिका की जिम्मेदारी अचानकमार टाइगर रिजर्व बायोस्फियर के पास है, जबकि इसके रखरखाव और सुधार के लिए बजट बिलासपुर वन मंडल द्वारा बनाया जाता है। दो विभागों के बीच तालमेल की कमी के कारण वाटिका की देखरेख सही ढंग से नहीं हो पा रही है, जिसका सीधा असर इसकी स्थिति पर पड़ा है।

वाटिका की लगातार बिगड़ती हालत को देखते हुए क्षेत्र के सांसद तोखन साहू और विधायक धर्मजीत सिंह ने आज स्मृति वाटिका का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण लोग यहां आना पसंद नहीं करते। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही स्मृति वाटिका को दोबारा संवारा जाएगा, ताकि लोग परिवार के साथ यहां समय बिता सकें।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग की अनदेखी के चलते स्मृति वाटिका कभी पर्यटकों से गुलजार नहीं हो पाई। यहां पीने के पानी की सुविधा तक नहीं है। बच्चों के झूले, फिटनेस उपकरण और मनोरंजन के साधन टूट चुके हैं। वाटिका का मुख्य आकर्षण रहा झरना भी कई महीनों से बंद पड़ा है।

अब सांसद-विधायक के निरीक्षण के बाद लोगों को उम्मीद जगी है कि स्मृति वाटिका को नया जीवन मिलेगा। हालांकि सवाल यही है कि यह पहल केवल कागजों तक सीमित रहेगी या वास्तव में जमीनी स्तर पर बदलाव दिखाई देगा। फिलहाल लोग इंतजार कर रहे हैं कि क्या स्मृति वाटिका फिर से हरियाली और खुशियों का केंद्र बन पाएगी या नहीं।

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