10 साल में 25 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी से उबरे, सामाजिक सुरक्षा के विस्तार से सशक्त हुआ समाज

दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की राजग सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का व्यापक असर देखने को मिला है। बीते दस वर्षों में देश के 25 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। इससे न केवल करोड़ों परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से समाज को मजबूती भी मिली है।

गरीबी उन्मूलन में डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (डीबीटी) जैसी योजनाओं की अहम भूमिका रही है। डीबीटी के जरिए सरकार ने बिचौलियों की भूमिका खत्म करते हुए लाभार्थियों तक सीधे मदद पहुंचाई। पिछले नौ वर्षों में करीब 28 लाख करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के तहत सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर किए गए। इससे पारदर्शिता बढ़ी और जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिल सकी।

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी में आई तेज गिरावट ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखी गई है। यह उपलब्धि सरकार की समावेशी विकास नीति और सामाजिक सुरक्षा के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। खासतौर पर निम्न मध्यम आय वर्ग, जहां प्रतिदिन 3.65 डॉलर की आय सीमा मानी जाती है, वहां गरीबी कम करने में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

गरीबी घटाने में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का बड़ा योगदान रहा है। वर्ष 2011-12 में ये राज्य देश के 65 प्रतिशत अत्यधिक गरीब लोगों का प्रतिनिधित्व करते थे। 2022-23 तक, अत्यधिक गरीबी में आई कुल गिरावट में इन राज्यों की हिस्सेदारी लगभग दो-तिहाई रही है।

रोजगार के मोर्चे पर भी स्थिति में सुधार हुआ है। 2021-22 के बाद से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार वृद्धि देखी गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में शहरी बेरोजगारी दर घटकर 6.6 प्रतिशत पर आ गई, जो 2017-18 के बाद सबसे कम है। उम्मीद है कि 2026 में सामाजिक सुरक्षा कवरेज का और विस्तार होगा, जिससे समाज के कमजोर वर्ग और अधिक सशक्त होंगे।

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