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ई-जीरो एफआईआर के बाद साइबर ठगी पर सख्ती, हर थाने में तैनात होगी टेक्नो फ्रेंडली पुलिस टीम

साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती को देखते हुए मध्य प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर व्यवस्था लागू होने के बाद अब इसकी प्रभावी जांच के लिए नई पहल की गई है। ग्वालियर में साइबर ठगी के मामलों की पड़ताल और आरोपियों की धरपकड़ के लिए हर थाने में टेक्नो फ्रेंडली पुलिसकर्मियों की टीम तैनात की जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत थानों से लेकर साइबर क्राइम विंग तक ऐसे पुलिसकर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो तकनीकी ज्ञान में दक्ष हों। इनमें टीआई, एसआई, एएसआई से लेकर हवलदार और आरक्षक स्तर तक के पुलिसकर्मी शामिल रहेंगे। इनका चयन स्वयं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक करेंगे और इसके लिए एक मानक प्रक्रिया भी तय की जाएगी।

ई-जीरो एफआईआर लागू होने के बाद अब साइबर ठगी की शिकायतें सीधे थानों में दर्ज हो रही हैं। पहले यह प्रक्रिया केवल क्राइम ब्रांच तक सीमित थी, लेकिन अब हर थाने में ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान करना जरूरी हो गया है, जो तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर सकें।

फिलहाल क्राइम ब्रांच से करीब 15 पुलिसकर्मियों को साइबर क्राइम विंग में शामिल किया गया है, लेकिन लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए आगे और स्टाफ बढ़ाया जाएगा। ई-जीरो एफआईआर के बाद सबसे पहले ठगी की रकम जिन खातों में गई है, उन्हें फ्रीज कराना, बैंकों से पत्राचार, पे-वॉलेट कंपनियों को ई-मेल भेजना और मैसेंजर प्लेटफॉर्म से रिकॉर्ड मंगाना जांच का अहम हिस्सा होगा।

दिल्ली के बाद मध्य प्रदेश ऐसा दूसरा राज्य है, जहां एक लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी की शिकायत पर स्वतः ई-जीरो एफआईआर दर्ज हो रही है। यह शिकायतें नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से प्राप्त होती हैं। शिकायत ई-एफआईआर में बदलते ही संबंधित जिले और थाने को स्थानांतरित कर दी जाती है।

ई-जीरो एफआईआर प्रणाली शुरू होने के महज पांच दिनों में ही 24 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पुलिस का मानना है कि साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती है और आने वाले समय में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए नए साल में इसे चुनौती के रूप में लेते हुए थानों और साइबर क्राइम विंग में टेक्नो फ्रेंडली पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाएगी और जांच को प्राथमिकता दी जाएगी।

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