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महाकाल मंदिर में नहीं मिला दर्शन, असद खान ने वाराणसी में की घर वापसी, बने अथर्व त्यागी

दिल्ली। मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले इंजीनियर असद खान ने सोमवार को वाराणसी में सनातन धर्म में घर वापसी कर ली। गंगा नदी के बीच नाव पर 21 ब्राह्मणों के वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ शुद्धिकरण और पूजन की प्रक्रिया पूरी कर उनका नया नाम अथर्व त्यागी रखा गया। असद के अनुसार, वह बचपन से ही बजरंग बली और भगवान शिव के प्रति आस्था रखते थे, लेकिन मुस्लिम नाम होने के कारण उन्हें कई बार मंदिरों में जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

असद बताते हैं कि कुछ दिन पहले वह उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन वहां कुछ लोगों द्वारा पहचान लिए जाने के बाद उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं मिल सका। इस घटना से वह बेहद आहत हो गए। तभी उन्होंने सनातन धर्म में वापसी का मन बना लिया था। उन्होंने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से काशी के ब्राह्मणों से संपर्क कर घर वापसी संस्कार कराने का अनुरोध किया।

घर वापसी का अनुष्ठान कराने वाले आलोक योगी ने बताया कि सबसे पहले असद का शुद्धिकरण किया गया, इसके बाद विधिवत पूजन कर उनका नामकरण संस्कार संपन्न कराया गया। पूरे अनुष्ठान के दौरान गंगा की लहरों के बीच मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही। इसके बाद असद से अथर्व त्यागी बने युवक ने सनातन धर्म की परंपराओं का पालन करने का संकल्प लिया।

अथर्व त्यागी ने बताया कि वह पेशे से इंजीनियर हैं और बचपन से ही मंदिरों में जाकर पूजा-पाठ करते आए हैं। बड़े होने के बाद उनका कहना है कि नाम के कारण कई जगहों पर असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही घटनाओं और मारपीट की खबरों ने उन्हें गहराई से झकझोर दिया, जिससे उनका मन और अधिक विचलित हो गया।

अथर्व का कहना है कि उन्होंने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी आस्था और अंतरात्मा की आवाज सुनकर यह फैसला लिया है। अब वह सनातन धर्म की परंपराओं के साथ नया जीवन शुरू करना चाहते हैं और भविष्य में धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा रखते हैं।

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