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“मुस्लिम कपल हिंदुओं से दोगुनी रफ्तार से बच्चे पैदा कर रहे…” किरीट सोमैया के बयान से गरमाई राजनीति

दिल्ली। जनसंख्या वृद्धि को लेकर बीजेपी नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया के बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि मुस्लिम दंपती हिंदुओं की तुलना में दोगुनी रफ्तार से बच्चे पैदा कर रहे हैं। अपने इस बयान के समर्थन में उन्होंने नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की रिपोर्ट का हवाला दिया है। उनका कहना है कि महाराष्ट्र, विशेषकर मुंबई जैसे शहरी क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर हिंदू आबादी की तुलना में कहीं अधिक तेजी से बढ़ रही है।

किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में औसत प्रजनन दर लगभग 1.4 है। उन्होंने दावा किया कि मुंबई में हिंदू परिवारों की प्रजनन दर 1.3 से भी कम बताई जा रही है। इसका अर्थ यह लगाया जा रहा है कि 10 हिंदू दंपती औसतन करीब 13 बच्चों को जन्म देते हैं। वहीं, उनके अनुसार मुंबई में मुस्लिम परिवारों की प्रजनन दर लगभग 3 है, यानी 10 मुस्लिम दंपती 26 या उससे अधिक बच्चों को जन्म देते हैं। इस आधार पर उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि मुस्लिम समुदाय की प्रजनन दर हिंदू समुदाय की तुलना में लगभग दोगुनी है।

इसके साथ ही किरीट सोमैया ने यह भी कहा कि मुंबई में जनसंख्या में बदलाव केवल प्राकृतिक प्रजनन वृद्धि का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें बांग्लादेशी प्रवासन की भी भूमिका बताई जा रही है। उनके अनुसार यह प्रवासन प्राकृतिक वृद्धि के अतिरिक्त है, जो शहर की जनसांख्यिकीय संरचना को प्रभावित कर रहा है।

हालांकि, जनसंख्या विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों का कहना है कि प्रजनन दर केवल धार्मिक आधार पर तय नहीं होती। शिक्षा का स्तर, शहरीकरण, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और महिला सशक्तिकरण जैसे कई सामाजिक-आर्थिक कारक इसमें निर्णायक भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि किसी समुदाय या शहर के बारे में निष्कर्ष निकालते समय आधिकारिक जनगणना, NFHS जैसी प्रमाणिक रिपोर्टों और सत्यापित अध्ययनों के आधार पर ही संतुलित आकलन किया जाना चाहिए, ताकि समाज में अनावश्यक भ्रम या तनाव न फैले।

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