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कश्मीरी भाषा पर सवाल से नाराज़ हुईं महबूबा मुफ्ती, मीडिया पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उस समय नाराज़ हो गईं, जब एक पत्रकार ने उनसे उर्दू में बोलने का आग्रह किया। महबूबा मुफ्ती ने कश्मीरी भाषा को सम्मान न दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और सवाल किया कि अन्य राज्यों के नेताओं से उनकी भाषा बदलने को क्यों नहीं कहा जाता।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत महबूबा मुफ्ती ने कश्मीरी भाषा में की थी। इसी दौरान एक पत्रकार ने उनसे उर्दू में बोलने को कहा, जिस पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मीडिया तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से अंग्रेजी या उर्दू में बोलने के लिए कभी नहीं कहता, फिर कश्मीरी नेताओं से ऐसा आग्रह क्यों किया जाता है। उन्होंने कश्मीरी पत्रकारों से भी अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान दिखाने की अपील की और कश्मीरी में ही अपनी बात आगे बढ़ाई।

महबूबा मुफ्ती ने इस दौरान देश में बढ़ती असहिष्णुता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुई लिंचिंग की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं पर चिंता जताने वाले लोग भारत में हो रही लिंचिंग पर अक्सर चुप रहते हैं। उनके मुताबिक, देश के कई हिस्सों में असहिष्णुता बढ़ी है, जो चिंताजनक है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार से अपील की कि देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले कश्मीरियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। खासतौर पर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन राज्यों में हाल के दिनों में कश्मीरियों के साथ घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को इन राज्यों में मंत्री स्तर की टीमें भेजकर हालात पर नजर रखनी चाहिए।

महबूबा मुफ्ती ने उत्तराखंड में एक कश्मीरी शॉल विक्रेता पर हुए हमले का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप किया था, जिसके बाद आरोपी की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 72 घंटे के भीतर कई घटनाएं सामने आ रही हैं, तो यह स्थिति बेहद गंभीर और चिंताजनक है।

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