उत्तर छत्तीसगढ़ में शीतलहर का कहर: अंबिकापुर 4.5 डिग्री पर पहुंचा पारा, सरगुजा-जगदलपुर में घना कोहरा; चार दिन बाद मिलेगी राहत

छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। खासकर उत्तर छत्तीसगढ़ के इलाकों में शीतलहर का असर साफ नजर आ रहा है। सरगुजा संभाग, अंबिकापुर और जगदलपुर में सुबह के समय घना कोहरा छाया रहा। मैनपाट में रात का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस और अंबिकापुर में 4.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो इस सीजन का सबसे कम तापमान माना जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटे तक न्यूनतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। हालांकि, इसके बाद अगले चार दिनों में तापमान 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने की संभावना है, जिससे लोगों को ठंड से कुछ राहत मिल सकती है।
बीते 24 घंटों में प्रदेश का सबसे अधिक अधिकतम तापमान जगदलपुर में 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में रहा। पेंड्रा, मैनपाट और आसपास के इलाकों में सुबह-शाम कड़ाके की ठंड के चलते लोग अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। कई जगहों पर ओस जमकर बर्फ में तब्दील होती दिखाई दी।
ठंड का सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। बीते एक महीने में सरकारी और निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से अधिक मामले सामने आए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, नवजात और छोटे बच्चों का शरीर तेजी से ठंडा होता है, जिससे उन्हें अधिक खतरा रहता है। गंभीर मामलों में बच्चों को एनआईसीयू और एसएनसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है।
ठंड बढ़ने के साथ अस्पतालों की ओपीडी में भी मरीजों की संख्या बढ़ गई है। वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और सांस से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की भीड़ देखी जा रही है। रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।
शीतलहर को देखते हुए नगर निगम ने राहत के इंतजाम तेज कर दिए हैं। शहर के कई इलाकों में अलाव जलाने की व्यवस्था की गई है, ताकि बेघर, राहगीरों और जरूरतमंद लोगों को ठंड से बचाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर लोगों से अपील की है कि ठंड के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और गर्म कपड़े पहनकर ही बाहर निकलें।
मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बदलते तापमान के कारण मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में साफ-सफाई, मच्छरों से बचाव और समय पर जांच को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है।





