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मर्सिडीज और BMW को छोड़ा क्यों? राष्ट्रपति पुतिन के साथ फॉर्च्यूनर में बैठे पीएम मोदी – जानिए वजह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल से हटकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एयरपोर्ट पर खुद स्वागत किया और इसके बाद दोनों नेता एक साधारण-सी दिखने वाली वाइट टोयोटा फॉर्च्यूनर में बैठकर रवाना हुए। आमतौर पर विदेशी मेहमानों के लिए मर्सिडीज या BMW जैसी लग्जरी गाड़ियां लगाई जाती हैं, ऐसे में फॉर्च्यूनर का चुनाव चर्चा का विषय बना हुआ है।

फॉर्च्यूनर में मोदी-पुतिन की यात्रा का मतलब
दोनों नेताओं ने अपनी बख्तरबंद कारों के बजाय भारत में बनी फॉर्च्यूनर का इस्तेमाल किया। इसे एक प्रतीकात्मक संदेश माना जा रहा है—पश्चिमी देशों पर निर्भरता कम करने का संकेत। फॉर्च्यूनर भले ही जापानी ब्रांड है, लेकिन इसका निर्माण भारत के कर्नाटक स्थित बिदादी प्लांट में होता है। पुतिन के बैठने से पहले रूसी एजेंसियों ने सुरक्षा की पूरी जांच की, जिससे यह भी संदेश गया कि रूस को भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर भरोसा है।

यूरोपीय कारों से दूरी का संकेत
यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका व यूरोपीय देशों द्वारा रूस पर भारी प्रतिबंध लगाए गए हैं। BMW और मर्सिडीज जर्मन कंपनियां हैं और जर्मनी यूक्रेन का बड़ा समर्थनकर्ता रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि पुतिन यूरोपीय कंपनियों की कारों में सफर नहीं करना चाहते थे। इस वजह से फॉर्च्यूनर जैसी गैर-यूरोपीय और भारत में बनने वाली SUV का चयन किया गया।

भारत में नेताओं की पसंद– फॉर्च्यूनर
फॉर्च्यूनर भारत की सबसे लोकप्रिय SUVs में से एक मानी जाती है और नेताओं की पहली पसंद रहती है। इसकी मजबूती, सड़कों पर पकड़ और सुरक्षा को देखते हुए इसे अक्सर वीआईपी मूवमेंट में शामिल किया जाता है। इसलिए मोदी-पुतिन का इस वाहन में सफर एक राजनयिक संदेश के साथ-साथ एक व्यावहारिक विकल्प भी दिखा।

पुतिन का भारत दौरा क्यों महत्वपूर्ण?
रूसी राष्ट्रपति का यह दो दिवसीय दौरा वैश्विक राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। 2022 में यूक्रेन युद्ध बढ़ने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। इस विजिट का फोकस रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष कार्यक्रमों में साझेदारी, आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देना और 100 बिलियन डॉलर व्यापार लक्ष्य तक पहुंचना है। दोनों देश पश्चिमी देशों पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

भारत-रूस संबंधों पर नजर
इस यात्रा में दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी-पुतिन की फॉर्च्यूनर डिप्लोमेसी केवल एक साधारण यात्रा नहीं, बल्कि भू-राजनीति में बदलते समीकरणों का स्पष्ट संकेत है।

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