सरकार ने वापस लिया संचार साथी ऐप का अनिवार्य प्री-इंस्टॉल आदेश

केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी स्मार्टफोन में Sanchar Saathi ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य नहीं होगा। यूजर्स अपनी इच्छा से इसे डाउनलोड या अनइंस्टॉल कर सकेंगे। सरकार का यह फैसला 1 दिसंबर को जारी आदेश पर देशभर में उठी प्राइवेसी और निगरानी संबंधी चिंताओं के बाद आया है।
सरकार ने बताया कि आदेश वापस लेने के पीछे मुख्य कारण ऐप की बढ़ती लोकप्रियता है। घोषणा के सिर्फ एक दिन बाद छह लाख नए रजिस्ट्रेशन हुए, जो सामान्य औसत से दस गुना अधिक हैं। 2023 में लॉन्च हुए ऐप के अब तक 1.4 करोड़ यूजर्स हैं और प्रतिदिन करीब 2,000 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज की जाती हैं। मंत्रालय के अनुसार, लोग स्वेच्छा से ऐप अपना रहे हैं, इसलिए इसे अनिवार्य बनाने की आवश्यकता नहीं है।
इससे पहले सरकार ने सभी स्मार्टफोन कंपनियों को 90 दिनों के भीतर अपने डिवाइस में संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल करने का निर्देश दिया था। आदेश जारी होते ही यूजर की स्वतंत्रता, डेटा प्राइवेसी और संभावित निगरानी को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई। विरोध बढ़ने पर संचार मंत्रालय ने कहा कि ऐप में किसी तरह का निगरानी तंत्र नहीं है और यह केवल साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए बनाया गया है।
Sanchar Saathi ऐप के जरिए लोग फर्जी या डुप्लिकेट IMEI की शिकायत, साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग और संदिग्ध कॉल अलर्ट जैसी सुविधाएं प्राप्त करते हैं। विशेषज्ञों और विपक्ष ने आशंका जताई थी कि किसी ऐप को अनिवार्य बनाना यूजर्स की आजादी और गोपनीयता पर प्रभाव डाल सकता है।
सरकार के आदेश वापस लेने के बाद अब यह ऐप पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा। यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार इसे डाउनलोड कर सकते हैं और कभी भी फोन से हटा भी सकते हैं।





