एसआईआर के मुद्दे पर संसद के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन, अंदर भी हंगामे के आसार

दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होते ही राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ गया है। सोमवार को सत्र के पहले दिन ही विपक्ष के जोरदार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा।
आज दूसरे दिन भी स्थिति शांत होने के आसार कम ही दिख रहे हैं। विपक्षी दल एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने के मूड में हैं। आरोप है कि सरकार उन क्षेत्रों में मतदाता सूची से नाम हटाने की कोशिश कर रही है जहाँ वह चुनावों में कमजोर रही है।
आज मंगलवार सुबह 10:30 बजे विपक्ष संसद भवन के मकर द्वार के सामने प्रदर्शन करेगा। कई विपक्षी नेता पहले ही बयान देकर सरकार पर लोकतंत्र कमजोर करने और मतदाता अधिकारों पर हमला करने का आरोप लगा चुके हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार नकली डेटा पेश कर रही है और वोटरों के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि विपक्ष लोकतंत्र और जनता के मुद्दों की रक्षा कर रहा है, जिसे ‘ड्रामा’ कहना गलत है।
सत्र के दौरान आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 पेश करेंगी। विपक्ष की कोशिश इस बिल सहित अन्य विधायी कार्यों को रोकते हुए पहले एसआईआर पर चर्चा की है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा में रूल 267 के तहत एसआईआर पर तत्काल चर्चा का नोटिस दिया है।
पहले दिन लोकसभा ने मणिपुर जीएसटी बिल को तो पारित कर दिया, लेकिन बाकी बहसें हंगामे की भेंट चढ़ गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र से पूर्व विपक्ष पर देशहित के बजाय नारेबाजी करने का आरोप लगाया था और कहा था कि संसद में “ड्रामा नहीं, डिलीवरी” होनी चाहिए।
यह सत्र 19 दिसंबर तक चलेगा। अब देखना होगा कि क्या मतदाता सूची विवाद पर सरकार और विपक्ष के बीच कोई सहमति बन पाती है या शीतकालीन सत्र केवल आरोप-प्रत्यारोप का मंच बनकर रह जाता है।





