भारत–अमेरिका डिफेंस समझौता: पुतिन यात्रा से पहले नौसेना को मिला बड़ा समर्थन पैकेज

श्रीलंका में हालिया चक्रवात और बाढ़ से जूझ रहे हालात के बीच भारत ने अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह करार हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की क्षमता को दीर्घकालिक मजबूती देने और रखरखाव से जुड़ी बाहरी निर्भरता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार भारत–अमेरिका के बीच 7,995 करोड़ रुपये के “फॉलो-ऑन सपोर्ट” पैकेज को मंजूरी मिली है. यह समझौता एमएच-60आर सीहॉक हेलीकॉप्टर बेड़े को अगले 5 वर्षों तक निरंतर ऑपरेशनल सपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए है. लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित यह हेलीकॉप्टर ब्लैकहॉक का समुद्री संस्करण है जो हर मौसम में कार्य करने और पनडुब्बी रोधी ऑपरेशन में सक्षम माना जाता है.
भारत ने फरवरी 2020 में 24 एमएच-60आर हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए अमेरिका के साथ प्रारंभिक समझौता किया था. पहली खेप के रूप में 3 हेलीकॉप्टर वर्ष 2021 में भारत को मिले. इस बेड़े से रक्षा निगरानी, समुद्री सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वॉरफेयर) क्षमता में बढ़ोतरी हुई है.
फॉलो-ऑन सपोर्ट पैकेज में पुर्जों की आपूर्ति, सहायक उपकरण, तकनीकी सहायता, मरम्मत, प्रशिक्षण और उत्पाद से जुड़ा निरंतर बैक-अप शामिल किया गया है. रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ये सुविधाएं देश में लॉन्ग-टर्म क्षमता निर्माण में सहायक होंगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप विदेशी निर्भरता घटाएंगी.
मंत्रालय के मुताबिक इस समझौते के लागू होने से माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) और अन्य भारतीय फर्मों के माध्यम से स्वदेशी सेवाओं व उत्पादों के विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा. सतत मेंटेनेंस सपोर्ट से हेलीकॉप्टरों की ऑपरेशनल उपलब्धता और तकनीकी रख-रखाव में उल्लेखनीय सुधार आने की उम्मीद है.
यह करार ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अगस्त में भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जाने के बाद कूटनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज थीं. हालांकि रक्षा सहयोग को रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से अलग ट्रैक पर आगे बढ़ाया गया है, जिससे साफ संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका सुरक्षा सहयोग हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर केंद्रीत है.





