कोडीन कफ सिरप नेटवर्क: करोड़ों की तस्करी, पूर्वांचल में बाहुबल कनेक्शन शक के घेरे में

उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित कोडीन मिक्स कफ सिरप की अंतरराष्ट्रीय तस्करी से जुड़े मामले में 100 करोड़ रुपये से बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है. जांच आगे बढ़ते ही पूर्वांचल के कुछ प्रभावशाली बाहुबलियों से कथित नजदीकी भी चर्चा में आ गई है, जिससे यह पूरा प्रकरण और सनसनीखेज हो गया है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक फैन बातचीत के दौरान बाहुबली समर्थकों को आरोपी अमित सिंह टाटा को “छोटा भाई” कहकर संबोधित करते देखा जा सकता है.
STF की कार्रवाई में एक फॉर्च्यूनर वाहन बरामद किया गया, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर UP65-9777 है. यह वही विशेष नंबर सीरीज बताई जा रही है, जो पूर्वांचल की एक चर्चित प्रभावशाली शख्सियत के काफिले की गाड़ियों में दिखाई देती रही है. वाहन अमित टाटा की पत्नी साक्षी सिंह के नाम पर दर्ज मिला है, लेकिन स्थानीय दावों के मुताबिक यह गाड़ी कई मौकों पर उसी काफिले का हिस्सा दिखी थी.
STF की पूछताछ में अमित टाटा ने दुबई और थाईलैंड (पटाया) यात्राओं और हवाला के माध्यम से लेन-देन की बात स्वीकारी है. निवेश के लालच में कम समय में 5 लाख रुपये से 30 लाख रुपये तक मुनाफे की चेन पर वह शुभम जायसवाल का साझेदार बना. दोनों की दुबई सफारी की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर परिसंचारित होती रहीं.
जांच में सामने आया है कि देव कृपा मेडिकल एजेंसी (झारखंड) और श्री मेडिकल एजेंसी (वाराणसी) कागजों पर अमित टाटा के नाम पर दर्ज थीं, लेकिन इनके संचालन और खेप प्रबंधन का काम शुभम जायसवाल और उसकी टीम संभालती थी. कफ सिरप की खेप बांग्लादेश तक भेजे जाने की पुष्टि भी की गई है. इसी धन से अमित टाटा पंचायत चुनाव में ब्लॉक प्रमुख पद की तैयारी कर रहा था.
एक और चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई कि कोडीन युक्त सिरप का प्रोडक्शन कंपनी ने सालों पहले बंद कर दिया था, बावजूद इसके शुभम की दो फर्में अब भी खुद को उसकी सुपर स्टॉकिस्ट बताकर नेटवर्क चला रही थीं. फर्जी बिल, फर्जी जीएसटी नंबर और दस्तावेजों के सहारे यह धंधा संचालित हो रहा था.
मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल, उसका भाई गौरव जायसवाल और सहयोगी वरुण सिंह इस समय दुबई में बताए जा रहे हैं. तीनों पर लुकआउट नोटिस जारी किया गया है और इसी के साथ कथित बाहुबल कनेक्शन की अलग दिशा में भी जांच शुरू कर दी गई है. पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने डीजीपी को पत्र लिखकर प्रभावशाली नामों की भूमिका की जांच की मांग की है.
अब अहम सवाल यह है कि क्या यह नेटवर्क सिर्फ कुछ तस्करों तक सीमित था या इसके तार पूर्वांचल के बाहुबल प्रभाव वाले बड़े नामों तक भी जाते हैं. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए तथ्यों और संभावित बड़े नामों की चर्चा भी तेज होती जा रही है.





