यूपी में एक और नाम बदलने की तैयारी, फाजिलनगर अब कहलाएगा पावानगर

उत्तर प्रदेश में शहरों के नाम बदलने की कड़ी में जल्द एक और नया अध्याय जुड़ने वाला है। कुशीनगर जिले के फाजिलनगर नगर पंचायत का नाम अब उसके ऐतिहासिक पहचान ‘पावानगर’ में बदला जाएगा। स्थानीय निकाय द्वारा पारित प्रस्ताव और जिला प्रशासन की संस्तुति के बाद राज्य सरकार इस पर अंतिम मुहर लगाने की प्रक्रिया पूरी कर रही है। नाम परिवर्तन की औपचारिक घोषणा जल्द जारी किए जाने की संभावना है।
फाजिलनगर का उल्लेख अब न केवल प्रशासनिक दस्तावेज़ों में चर्चा का विषय बना हुआ है, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण भी यह फैसला प्रदेश भर में सुर्खियां बटोर रहा है। स्थानीय विधायक सुरेंद्र कुमार कुशवाहा ने नाम परिवर्तन की पुष्टि करते हुए बताया कि सरकार जल्द इसकी आधिकारिक घोषणा करेगी। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी गाजियाबाद में एक समारोह के दौरान इस निर्णय का ज़िक्र किया, जिससे संकेत साफ मिल गए कि प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है।
धरती से जुड़ा आस्था और इतिहास
इतिहास और धार्मिक ग्रंथों के आधार पर फाजिलनगर का प्राचीन नाम पावानगर ही रहा है। मान्यता है कि भगवान बुद्ध कुशीनगर में महापरिनिर्वाण प्राप्त करने से पहले इसी मार्ग से गुज़रे थे और उनका अंतिम भोजन भी इसी स्थान पर हुआ था। इसके अलावा, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी ने भी पावानगर में ही निर्वाण प्राप्त किया था। इसी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के कारण हर साल बड़ी संख्या में बौद्ध और जैन अनुयायी यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
नगर पंचायत का प्रस्ताव, प्रशासन की संस्तुति
14 अक्टूबर को नगर पंचायत की बैठक में फाजिलनगर का नाम बदलकर पावानगर किए जाने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसके बाद प्रस्ताव जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के पास भेजा गया, जहां से संस्तुति के साथ इसे शासन को अग्रेषित कर दिया गया।
कैबिनेट से पहले ही मिल चुकी है स्वीकृति
विधायक कुशवाहा के मुताबिक, राज्य कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी थी। अब केवल शासन स्तर की अंतिम प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं, जिसके बाद नाम परिवर्तन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
क्षेत्र में खुशी की लहर
स्थानीय निवासियों, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं में इस ऐतिहासिक नाम की वापसी को लेकर उत्साह का माहौल है। लोगों का कहना है कि ‘पावानगर’ नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि इस धरती की आत्मा और उसकी विरासत है, जिसे अब सम्मान के साथ लौटाया जा रहा है।





