छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा 2025: 10 दिन पहले, तैयारी पर बड़ा दबाव

छत्तीसगढ़ में इस साल 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं तय समय से 10 दिन पहले शुरू होंगी, जिससे स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। छग माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी नई समय-सारिणी के मुताबिक 12वीं की मुख्य परीक्षा 20 फरवरी 2026 से शुरू होकर 18 मार्च 2026 तक और 10वीं की परीक्षा 21 फरवरी 2026 से 13 मार्च 2026 तक चलेगी। पिछले वर्षों में ये परीक्षाएं 1 मार्च से 28–28 मार्च तक आयोजित होती थीं, जिसमें छात्रों को परीक्षा से पहले 10 दिनों का अतिरिक्त अभ्यास और रिवीजन टाइम घर पर मिल जाता था। लेकिन इस बार यह समय घट गया है, जिससे सिलेबस समय पर पूरा कराना बड़ी चुनौती बन गया है।
राजनांदगांव जिले के स्कूल प्रमुखों ने बताया कि कई विषयों में विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी अब भी बनी हुई है। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के बावजूद अधिकांश विषय-विशेषज्ञ शिक्षक अपनी मूल संस्था के बजाय अन्यत्र सेवाएं दे रहे हैं, जिसके कारण बोर्ड परीक्षार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं, एसआईआर परीक्षा कार्य में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगने से पढ़ाई और पिछड़ रही है।
प्राचार्यों का कहना है कि कोर्स बहुत पीछे चल रहा है और छात्रों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं और ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। शिक्षकों के गैर-शिक्षकीय कार्यों में लगने से भी नियमित कक्षाएं बाधित हो रही हैं, जिसका सीधा प्रभाव छात्रों की बोर्ड तैयारी पर पड़ सकता है और नतीजों पर असर की आशंका है।
मंडल ने मुख्य परीक्षाओं से पहले होने वाली प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) परीक्षा की भी तिथियां घोषित कर दी हैं। सभी संबद्ध स्कूलों को 1 जनवरी 2026 से 20 जनवरी 2026 तक दो पालियों में प्रायोगिक परीक्षाएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बीच, जिले में संचालित ऑनलाइन कोचिंग और ब्लूप्रिंट आधारित प्रश्न बैंक विद्यार्थियों के लिए राहत बनकर सामने आया है। राज्य स्तर पर भी जिले की इस पहल की सराहना की गई है। ऑनलाइन कक्षाओं को यूट्यूब से लिंक करने के बाद यह मॉडल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सेजस बख्शी स्कूल, बसंतपुर में संचालित कंट्रोल रूम की यूट्यूब लिंक तीन दिन में 1700+ सब्सक्राइबर के साथ मोनेटाइज हो चुकी है, जो विद्यार्थियों और शिक्षकों की सकारात्मक भागीदारी को दर्शाता है।
शिक्षा विभाग का दावा है कि इस नवाचार से जिले सहित राज्यभर के छात्रों को संरचित तैयारी का मंच मिल रहा है, लेकिन सिलेबस पूरा करने और शिक्षक व्यवस्था को दुरुस्त करना बोर्ड परीक्षा प्रक्रिया की सबसे बड़ी जरूरत बनी हुई है। आगामी परीक्षाओं में प्रदर्शन सुधार के लिए छात्रों को उपलब्ध संसाधनों के साथ अधिक स्वाध्यायी अभ्यास और रणनीतिक रिवीजन पर ध्यान देना होगा।





