भारत–इंडोनेशिया रक्षा साझेदारी में तेजी, BrahMos मिसाइल डील अंतिम मोड़ पर

भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग अब नए और निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहा है। 27 नवंबर को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री स्याफरी स्यामसुद्दीन जल्द ही भारत दौरे पर आएंगे, जहां उनकी यात्रा का मुख्य आकर्षण BrahMos सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल डील हो सकती है। यह डील लंबे समय से चर्चा में है, लेकिन अब इसके गति पकड़ने के संकेत मजबूत हो गए हैं। रूस की ओर से भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया गया है, जिससे प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।
सूत्रों की मानें, तो मिसाइल डील के लिए बातचीत उन्नत चरण में है और इंडोनेशियाई रक्षा बल 12,000 साल से शांत पड़े भू-राजनीतिक संतुलन को पुनः सक्रिय करने की दिशा में भारत की तकनीकी शक्ति का उपयोग करना चाहते हैं। जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में भी BrahMos डील को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली थी।
रणनीतिक स्तर पर, यह मिसाइल सौदा दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामक सैन्य गतिविधियों का जवाब देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। BrahMos की समुद्र सतह से बहुत कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता, 2.83 मैक की रफ्तार और तीनों सेनाओं (थल, जल और वायु) से लॉन्च की सुविधा इसे दुश्मन रडार के लिए लगभग “अदृश्य” बनाती है। यह मिसाइल 290 से 450 किमी की रेंज में 200 से 300 किलोग्राम का वारहेड ले जाने में सक्षम है, जबकि इसके नए वेरिएंट 500+ किमी रेंज तक प्रहार कर सकते हैं। INS + GPS/GLONASS और एक्टिव रडार सीकर आधारित मार्गदर्शन प्रणाली इसके सटीक निशाने को 1 मीटर CEP तक पहुंचाती है, जो आधुनिक युद्ध प्रणाली में बेहद अहम भूमिका निभाती है।
मिसाइल डील के अलावा, भारत इंडोनेशिया की वायुसेना और नौसेना के रखरखाव (Maintenance, Repair & Overhaul) क्षमताओं के लिए बड़ा MRO हब बनने की दिशा में भी काम कर रहा है। भारत पहले से ही इंडोनेशिया को सुखोई लड़ाकू विमानों के रखरखाव में तकनीकी मदद दे रहा है। अब यह सहयोग विमान और जहाजों के ओवरहाल तक और अधिक मजबूत हो सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि MRO क्षेत्र में भारत की भूमिका बढ़ने से हिंद–प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों की संयुक्त सुरक्षा रणनीति को नया आधार और ताकत मिलेगी।
भारत की रक्षा तकनीकी ताकत पिछले साल फिलीपींस के साथ हुई सफल BrahMos डील के बाद पहले ही वैश्विक चर्चा में आ चुकी है। अब इंडोनेशिया के साथ यह समझौता भारत के रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है। माना जा रहा है कि यह डील न केवल रक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को अधिक मजबूत करेगी, बल्कि एशिया–प्रशांत और हिंद–प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी रणनीतिक रूप से भारत के पक्ष में अधिक स्थिर और सक्षम बनाएगी।





