बंगाल में बाबरी मस्जिद शिलान्यास ने बढ़ाई सियासी गर्मी, ममता बनर्जी घिरीं भाजपा और ओवैसी के बीच

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक हुमायूं कबीर के नई बाबरी मस्जिद बनाने के ऐलान ने सियासी वातावरण को गर्मा दिया है। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 6 दिसंबर को मस्जिद शिलान्यास करने की घोषणा के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला तेज कर दिया है, वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी मुस्लिम बहुल जिलों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

हुमायूं कबीर के ऐलान के बाद भाजपा ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस बंगाल में बाबरी मस्जिद नहीं बल्कि ‘बांग्लादेश’ बनाने की कोशिश कर रही है। केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रवक्ताओं ने कहा कि यह तुष्टिकरण की राजनीति है और ममता बनर्जी हिंदू-मुस्लिम मतों को ध्रुवीकृत कर रही हैं।

इस बीच, ममता बनर्जी ने मालदा और मुर्शिदाबाद के दौरे का ऐलान किया है। 3 और 4 दिसंबर को वह इन जिलों में बैठकें करेंगी। माना जा रहा है कि वह मुस्लिम समुदाय को संबोधित करेंगी और हुमायूं कबीर के बयान के बीच अपने राजनीतिक कदमों को स्पष्ट करेंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुस्लिम बहुल जिलों में अब सवाल उठ रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस को वोट देने के बावजूद समुदाय पिछड़ा हुआ महसूस कर रहा है। इस स्थिति का फायदा AIMIM उठाने की कोशिश कर रही है, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव में मुस्लिम वोटों के बंटने की संभावना बढ़ गई है।

हुमायूं कबीर ने ऐलान किया है कि बाबरी मस्जिद की नींव 6 दिसंबर, 1992 की अयोध्या की घटना की बरसी पर रखी जाएगी और निर्माण में तीन साल का समय लगेगा। हालांकि, TMC ने यह स्पष्ट किया कि विधायक का बयान पार्टी का आधिकारिक स्टैंड नहीं है।

राजनीतिक गलियारों में इसे हिंदू-मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस ने मस्जिद निर्माण पर विवादित बयान को ‘बेमतलब का शक’ करार देते हुए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हवाला दिया।

इस ऐलान से बंगाल की सियासत में नया मोड़ आ गया है और विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच संवेदनशील धार्मिक और राजनीतिक माहौल बनता जा रहा है।

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