स्वदेशी ‘स्काई गार्ड’ ड्रोन से 7 दिन की निगरानी, रक्षा ताकत को नया आसमान

भारतीय सेनाओं की हवाई निगरानी क्षमता आने वाले दिनों में एक बड़े बदलाव की दहलीज़ पर खड़ी है. मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की नीति को नई उड़ान देते हुए स्वदेशी डिफेंस स्टार्टअप कंपनी स्काई गार्ड–नाइट्रोडायनेमिक्स एयरोस्पेस एंड डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड ने भारतीय सेना और नौसेना को अपने अत्याधुनिक लार्ज यूएवी (Large UAV) सर्विलांस ड्रोन ‘स्काई गार्ड’ को शामिल करने का आधिकारिक प्रस्ताव भेजा है. इस ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत इसकी अभूतपूर्व एंड्योरेंस (Endurance) है, जो इसे एक बार उड़ान भरने पर 6 से 7 दिनों तक लगातार आसमान में निगरानी मिशन जारी रखने में सक्षम बनाती है.

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एयर सर्विलांस में किसी भी ड्रोन का लंबे समय तक बिना लैंड किए ऑपरेशन करना, आधुनिक युद्ध रणनीति में गेमचेंजर साबित होता है. ‘स्काई गार्ड’ इसी सिद्धांत पर तैयार किया गया है. इसमें हाई–रेजोल्यूशन ऑप्टिकल और इंफ्रारेड (IR) कैमरों के साथ अत्याधुनिक मल्टी–लेयर सेंसर सिस्टम लगाया गया है, जो मौसम, रात–दिन, धुंध और कम दृश्यता में भी दुश्मन की गतिविधियों को बेहद स्पष्ट और सटीक रूप से कैप्चर कर सकता है. कैमरों और सेंसर से रिकॉर्ड किया गया डेटा, रियल–टाइम ट्रांसमिशन के ज़रिए सीधे कंट्रोल रूम और ऑपरेशन बेस तक सुरक्षित कम्युनिकेशन चैनल से भेजा जाता है. यही वजह है कि सीमा पर संदिग्ध मूवमेंट, रडार लोकेशन, दुश्मन की संचार प्रणाली में हलचल, सैन्य जमावड़ा और टैक्टिकल पोजिशन जैसे इनपुट भारतीय सुरक्षा बलों को तुरंत उपलब्ध हो सकते हैं.

इस ड्रोन को पूरी तरह से मॉड्यूलर डिजाइन में तैयार किया गया है, ताकि ज़रूरत के अनुसार इसे विभिन्न मिशनों में तुरंत अनुकूलित किया जा सके. सीमाई निगरानी, रीकॉन (Reconnaissance), नौसैनिक ऑपरेशन, भीड़ प्रबंधन, क़ानून–व्यवस्था से जुड़े मिशन, आपदा राहत, पर्यावरण निगरानी और संवेदनशील इलाकों की 24×7 ट्रैकिंग में भी ‘स्काई गार्ड’ का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह ड्रोन अत्यंत कम ध्वनि के साथ काम करता है, जिससे इसे ‘लो–ऑडिबल’ (Low–audible) श्रेणी में रखा गया है. यह फीचर दुश्मन को इसकी उपस्थिति का एहसास दिए बिना खुफिया ऑपरेशन को अंजाम देने में बेहद मददगार सिद्ध हो सकता है.

भारत पहले से डिफेंस प्रोडक्शन में विदेशी तकनीक पर बड़ी हद तक निर्भर रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने हथियार, सेंसर, सर्विलांस और रक्षा उपकरणों के देसी उत्पादन को प्राथमिक प्राथमिकता दी है. इसका उद्देश्य न सिर्फ़ बाहरी निर्भरता कम करना है, बल्कि भारतीय सुरक्षा ढांचे में स्वदेशी रियल–टाइम समाधानों को बढ़ावा देकर रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल करना भी है. अगर ‘स्काई गार्ड’ को सेना के बेड़े में शामिल किया जाता है, तो यह न केवल रिकॉर्ड–ब्रेकिंग निगरानी क्षमता देगा, बल्कि मेक इन इंडिया के डिफेंस सप्लाई चेन को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकता है.

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे यूएवी के शामिल होने से सीमा सुरक्षा और समुद्री निगरानी में बड़ा अंतर आएगा. पाकिस्तान और चीन की सीमा पर जहां निगरानी चुनौतीपूर्ण रही है, वहां ‘स्काई गार्ड’ तकनीकी, रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक बढ़त प्रदान कर सकता है. यह ड्रोन सिर्फ़ एक मशीन नहीं, बल्कि भारत की उभरती रक्षा आकांक्षाओं की परिचय–रेखा है—जो बताती है कि अब भारत सुरक्षा के आसमान में निगरानी नहीं, बादशाहत चाहता है.

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