शादी समारोह से लौट रही आल्टो पुल से पलटी, नदी में समाने से 5 की मौत; कार सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से सटे लखीमपुर–खीरी ज़िले में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा हुआ, जिसमें शादी समारोह से लौट रहे एक ही समुदाय के पांच लोगों की नदी में डूबने से मौत हो गई। दुर्घटना उस समय हुई जब बरात से लौट रही आल्टो कार पुल पर असंतुलित होकर सीधे सुटिया नदी में गिर पड़ी। तेज़ गिरावट और कार का सेंट्रल लॉक सिस्टम सक्रिय होने के कारण वाहन का गेट मौके पर लॉक हो गया, जिससे अंदर बैठे लोग पानी के तेज़ बहाव में फंस कर बाहर नहीं निकल पाए।
जानकारी के अनुसार, कार में छह लोग सवार थे, जो देर रात एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होकर वापस बहराइच ज़िले की ओर जा रहे थे। वाहन जब गांव मझरा पूरब स्थित पुल पर पहुंचा, तभी कार के संतुलन बिगड़ने की आवाज़ स्थानीय निवासियों ने सुनी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सड़क पर हल्का कोहरा था और पुल पर स्पीड नियंत्रण के कोई स्पष्ट संकेतक न होने से कार चालक ने संतुलन खो दिया। टक्कर के बाद गाड़ी हवा में उछलती हुई नदी में समा गई।
हादसे के कुछ देर बाद स्थानीय ग्रामीण और राहगीर पानी में उतरकर मदद की कोशिश में जुटे, लेकिन तब तक कार आधी से ज़्यादा डूब चुकी थी। पुलिस और आपात टीम को सूचना दी गई, जिसके बाद राहत अभियान चलाया गया। मझरा पूरब थाने की पुलिस ने कार को क्रेन की मदद से बाहर निकाला। वाहन के अंदर से पांच लोगों के शव बरामद किए गए। घायल चालक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
मृतकों की पहचान जितेंद्र मल्लाह (23), घनश्याम मल्लाह (25), लालजी मल्लाह (45), अजीमुल्ला (45) और सुरेंद्र मल्लाह (56) के रूप में हुई है। सभी मृतक बहराइच के सुजौली थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के निवासी थे और आपस में पारिवारिक–सामाजिक रिश्तों से जुड़े बताए जा रहे हैं। एक साथ पांच मौतों की खबर मिलते ही उनके गांवों में मातमी सन्नाटा छा गया। परिजनों ने प्रशासन से हादसे की निष्पक्ष जांच और पुल सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है।
घटना के बाद कारों में मौजूद सुरक्षा फीचर, खासकर ऑटो–लॉक सिस्टम और आपात रेस्क्यू एक्सेस को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक वाहनों में ऑटो–लॉक आम सुविधा है, लेकिन पानी, आग या ऊंचाई से गिरने जैसी इमरजेंसी स्थिति में अनिवार्य मैनुअल ओवर–राइड सिस्टम को बढ़ावा देना ज़रूरी है, जो ऐसी आपदाओं में जीवन बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
पुल के रख-रखाव और रोड सेफ्टी पर गंभीर टिप्पणियां सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि बहुमंज़िला पुलों और ग्रामीण नदी पुलों पर रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड, ब्रेकर–एप्रोच मार्किंग और नाइट विज़न इंडिकेटर अनिवार्य किए जाएं।
घटना को संज्ञान में लेते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के पीछे ओवरस्पीड, सड़क स्थिति, लॉक–मैकेनिज़्म और दृश्यता जैसे बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों या लापरवाह एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि शादी समारोह जैसी खुशी के क्षण भी सुरक्षा में छोटी–सी चूक के कारण गहरे दर्द में बदल सकते हैं।





