भारत-कनाडा की यूरेनियम डील बदल सकती है वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा परिदृश्य

भारत और कनाडा के बीच जल्द ही एक ऐतिहासिक यूरेनियम डील होने वाली है, जो दोनों देशों के बीच ऊर्जा और परमाणु सहयोग को नई दिशा दे सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता लगभग 10 साल तक चलेगा और इसके तहत कनाडा की प्रमुख कंपनी Cameco Corp भारत को यूरेनियम की सप्लाई करेगी। डील का अनुमानित मूल्य करीब 2.8 अरब अमेरिकी डॉलर है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता केवल ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच व्यापक परमाणु सहयोग प्रयास का हिस्सा हो सकता है। यूरेनियम की निरंतर आपूर्ति से भारत को न्यूक्लियर पावर सेक्टर में अपनी क्षमता बढ़ाने का अवसर मिलेगा और वैश्विक स्तर पर उसकी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
यह डील ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक व्यापार तनाव भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं, चीन अपनी वैश्विक सप्लाई चेन में प्रभुत्व बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत-कनाडा समझौता अमेरिका और चीन दोनों की नजरों में महत्वपूर्ण आर्थिक और भू-राजनीतिक संकेत है।
हाल ही में, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने उच्च महत्वाकांक्षी व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर बातचीत को फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की। इस समझौते का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और न्यूक्लियर पावर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। साथ ही, यह वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक परिदृश्य में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा। डील से अमेरिकी और चीनी नीतियों पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि यह भारत और कनाडा के बीच रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है।
सरकारी और व्यापारिक सूत्रों ने कहा कि दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों और व्यापार विभागों के बीच बातचीत जारी है, जिससे डील पर अंतिम हस्ताक्षर जल्द ही हो सकते हैं। इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के न्यूक्लियर पावर और ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलाव की संभावना बढ़ जाएगी।





