विश्व गुरु बनने के लिए शिक्षा में संस्कृति और संस्कार जरूरी, BSB की अलीगढ़ में महत्वपूर्ण बैठक

भारतीय शिक्षा बोर्ड (BSB) की मंडल स्तर की संगोष्ठी अलीगढ़ के कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर में आयोजित की गई, जिसमें देशभर के लगभग 300 विद्यालयों के प्रबंधक, प्राचार्य और प्रतिनिधि शामिल हुए। संगोष्ठी का शुभारंभ वेद मंत्रों के साथ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त आईएएस और BSB चेयरमैन डॉ. एन पी सिंह ने भारतीय शिक्षा बोर्ड की आवश्यकता और शिक्षा में संस्कृति-संस्कार को शामिल करने के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
डॉ. सिंह ने कहा कि आधुनिक पाश्चात्य शिक्षा के परिवेश में भारतीय संस्कृति और मूल्यों की कमी के कारण विद्यार्थियों का नैतिक पतन हो रहा है। उन्होंने बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड का उद्देश्य बच्चों को वेद, शास्त्र, उपनिषद, गीता जैसी आध्यात्मिक शिक्षाओं के साथ आधुनिक विज्ञान और कंप्यूटर शिक्षा से जोड़कर चरित्रवान और संस्कारयुक्त बनाना है। इसके लिए भौतिकतावादी सोच से हटकर विद्यार्थियों के मानस में सही विचार और मूल्यों का समावेश करना आवश्यक है।
मुख्य अतिथि मंडलायुक्त संगीता सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों में संस्कार पैदा करने का मुख्य दायित्व माता-पिता और शिक्षक का है, और यह वातावरण पर भी निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि हमें बड़ी इमारतों और भव्य सुविधाओं से आकर्षित होने के बजाय प्राचीन वैदिक संस्कृति और शिक्षण पद्धति की ओर लौटना चाहिए। इसके लिए विद्यालयों को भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध कराना आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथियों में मनोज गिरि, संयुक्त निदेशक, और राकेश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी, ने भी शिक्षा और संस्कार के महत्व पर विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी का संचालन सुनील शास्त्री, राज्य प्रभारी भारत स्वाभिमान, ने किया।
कार्यक्रम में पतंजलि परिवार और राज्य कार्यकारिणी के कई सदस्य उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि यह संगोष्ठी शिक्षा में भारतीय संस्कृति, संस्कार और आधुनिक तकनीकी शिक्षा के संतुलन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की गई।
अंत में सभी प्रतिभागियों ने प्रतिज्ञा की कि वे अपने-अपने विद्यालयों में भारतीय शिक्षा बोर्ड को अपनाकर विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त और गुणात्मक शिक्षा देंगे। इस पहल के माध्यम से भारत को वैश्विक स्तर पर शिक्षा और संस्कृति में अग्रणी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।





