महागठबंधन ने साधा तालमेल, बिहार चुनाव से पहले डैमेज कंट्रोल में जुटे तेजस्वी और राहुल

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन ने अपनी अंदरूनी खींचतान को थामने और एकजुटता का संदेश देने की पूरी कोशिश शुरू कर दी है। सीट बंटवारे को लेकर लंबे समय तक चली तनातनी के बाद अब आरजेडी और कांग्रेस के बीच तालमेल को सार्वजनिक रूप से दिखाया जा रहा है।
महागठबंधन में मतभेद तब गहराए जब आरजेडी, कांग्रेस और वीआईपी ने कुछ सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवार घोषित कर दिए थे। कई जगहों पर एक-दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारने से स्थिति असहज हो गई थी। संवाद की कमी को दूर करने के लिए कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पटना भेजा। गहलोत ने लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव से मुलाकात कर विवाद सुलझाने की कोशिश की।
इसके अगले ही दिन पटना में महागठबंधन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमें तेजस्वी यादव को गठबंधन का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया गया। हालांकि, इस कार्यक्रम में राहुल गांधी की गैरमौजूदगी पर बीजेपी ने सवाल उठाए थे। इसके बाद महागठबंधन ने गलती सुधारते हुए 28 अक्टूबर को जारी घोषणापत्र में राहुल गांधी की तस्वीर को प्रमुखता से शामिल किया।
महागठबंधन ने एनडीए से पहले अपना घोषणापत्र जारी कर राजनीतिक बढ़त लेने की कोशिश की है। “बिहार का तेजस्वी प्रण” नाम से जारी इस घोषणापत्र में अगले पांच वर्षों के विकास का खाका पेश किया गया है।
राहुल गांधी अब चुनाव प्रचार में सक्रिय हो गए हैं। वह आज सकरा और दरभंगा में रैलियां करेंगे, जहां तेजस्वी यादव भी उनके साथ मौजूद रहेंगे। यह साझा मंच दोनों दलों के बीच तालमेल का संदेश देने के लिए अहम माना जा रहा है।
कांग्रेस ने यह रणनीति भी अपनाई है कि जिन 11 सीटों पर “फ्रेंडली फाइट” है, वहां उसके बड़े नेता प्रचार के लिए नहीं जाएंगे। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी बिहार में कुल 22 रैलियां करेंगे, लेकिन किसी भी विवादित सीट पर प्रचार से दूरी रखेंगे।
महागठबंधन की संयुक्त रैली 10 नवंबर को होने वाली है, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और तेजस्वी यादव एक मंच पर नजर आएंगे। इसका उद्देश्य साफ है—वोटिंग से पहले जनता के बीच एकजुटता का स्पष्ट संदेश देना।





