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हरियाणा के गांव से सुप्रीम कोर्ट की सर्वोच्च कुर्सी तक: देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश बनेंगे जस्टिस सूर्यकांत

देश के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत जल्द ही भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनेंगे। वह 24 नवंबर को यह पद संभालेंगे, जबकि मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगे। अपने न्यायिक करियर में ईमानदारी, संवैधानिक समझ और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण के लिए पहचाने जाने वाले जस्टिस सूर्यकांत का सफर हरियाणा के एक छोटे से गांव से सुप्रीम कोर्ट की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुंचने की प्रेरणादायक कहानी है।

10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के पेट्वर गांव में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का बचपन बेहद साधारण माहौल में बीता। उन्होंने गांव के स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की और 1981 में गवर्नमेंट पीजी कॉलेज, हिसार से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून (एलएलबी) की पढ़ाई पूरी की। उसी वर्ष उन्होंने हिसार के जिला न्यायालय से वकालत शुरू की और जल्द ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे। संवैधानिक, सेवा और नागरिक मामलों में उनकी गहरी समझ ने उन्हें एक कुशल अधिवक्ता के रूप में पहचान दिलाई।

जस्टिस सूर्यकांत का न्यायिक दृष्टिकोण हमेशा सामाजिक मुद्दों से जुड़ा रहा है। उन्होंने भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, आरक्षण, सार्वजनिक संसाधनों की सुरक्षा और पीड़ितों के अधिकारों जैसे विषयों पर कई अहम फैसले दिए। उनके निर्णयों ने संवैधानिक मर्यादा और सामाजिक न्याय को नई दिशा दी।

7 जुलाई 2000 को वे हरियाणा के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने। अगले वर्ष उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा मिला। 9 जनवरी 2004 को वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बने और 5 अक्टूबर 2018 को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए। वहां उनके प्रशासनिक कौशल और न्यायिक दृष्टिकोण की व्यापक सराहना हुई।

अब केंद्र सरकार ने नए सीजेआई की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे और 9 फरवरी 2027 तक इस पद पर बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट की नियुक्ति प्रक्रिया (मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर) के अनुसार, सबसे वरिष्ठ और उपयुक्त न्यायाधीश को ही सीजेआई बनाया जाता है।

जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह उस व्यक्ति की कहानी है जिसने अपने समर्पण और न्यायप्रियता से भारतीय न्यायपालिका में एक नई मिसाल कायम की है।

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