डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के 7 मंत्र: छात्रों के लिए सफलता की सच्ची सीख

भारत के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्मदिन हर साल 15 अक्टूबर को विश्व छात्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2010 में इस दिन को उनके योगदान के सम्मान में ‘वर्ल्ड स्टूडेंट डे’ के रूप में मान्यता दी थी। कलाम हमेशा युवाओं और छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत रहे। उन्होंने कहा था — “सपने वो नहीं जो हम नींद में देखते हैं, सपने वो हैं जो हमें सोने नहीं देते।”
डॉ. कलाम मानते थे कि हर छात्र में अपार प्रतिभा होती है, बस उसे पहचानने और दिशा देने की जरूरत होती है। वे छात्रों से कहते थे कि असफलता से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि असफलता ही सफलता का पहला चरण होती है। उन्होंने सिखाया कि किसी उपलब्धि पर रुकना नहीं चाहिए, बल्कि लगातार बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए।
उनका पहला मंत्र था — सपना देखो और उसे साकार करने का साहस रखो। दूसरा — शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिससे दुनिया बदली जा सकती है। तीसरा — अपने प्रति ईमानदार और दूसरों के प्रति संवेदनशील बनो। उनका मानना था कि यही गुण किसी भी छात्र को आदर्श नागरिक बनाते हैं।
कलाम का चौथा मंत्र था — हर बाधा से सीखो, हार मानना कभी मत सीखो। वे कहते थे कि “मुश्किलें तभी आती हैं, जब आप अपने लक्ष्य से नज़रें हटा लेते हैं।” पाँचवाँ मंत्र था — अच्छा शिक्षक और सही मार्गदर्शन सफलता की कुंजी है। वे मानते थे कि एक शिक्षक सिर्फ ज्ञान नहीं देता, बल्कि छात्रों के भीतर छिपी आग को जगाता है।
छठा मंत्र था — अपनी रुचि के विषय चुनो और दिल से पढ़ो। कलाम के अनुसार, शिक्षा बोझ नहीं, आनंद होनी चाहिए। सातवाँ मंत्र था — मातृभाषा में सीखो, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ने के लिए अंग्रेजी जैसी संपर्क भाषा को भी अपनाओ।
डॉ. कलाम का जीवन इस बात का उदाहरण है कि मेहनत, ईमानदारी और सपनों की ताकत से कोई भी साधारण व्यक्ति असाधारण ऊंचाइयां छू सकता है। उनके ये 7 मंत्र आज भी हर छात्र के लिए प्रेरणा और सफलता का मार्गदर्शन बने हुए हैं।





