Et af de længst eksisterende offshore-navne er stadig Queenvegas selvom konkurrencen er blevet hård. I sammanställningar av nyare alternativ förekommer Slotser casino som ett av flera mindre kända varumärken. Bland mindre etablerade sajter återfinns Newlucky casino som har en relativt enkel webbplats men ett brett spelutbud. För dem som vill veta mer om sajter utan begränsningar kan man klicka här och bläddra bland alternativen. Among lion-themed brand entries is www.leoncasino.nu which sits alongside several similar names. För spelare som är nyfikna på bonus buy-mekaniken kan man läs mer här för en bredare överblick.

छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी में कोयला ट्रांसपोर्टिंग टेंडर दो महीने से रुका, पारदर्शिता पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत जनरेशन कंपनी के कोयला ट्रांसपोर्टिंग टेंडर को दो महीने बीतने के बावजूद नहीं खोला गया है। इससे न केवल ट्रांसपोर्टर भ्रमित हैं, बल्कि कंपनी की पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, कंपनी हर साल कोल प्लांटों तक कोयला पहुंचाने में 500-700 करोड़ रुपये खर्च करती है। पिछले अनुभव में उच्च दरों पर टेंडर दिए जाने से 100-150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा था। इस पर अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकला कि कम दरों में यह काम संभव है। इसके बाद नया टेंडर जारी किया गया, लेकिन इसे बीच में ही रोक दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि यदि टेंडर पारदर्शिता से खोला गया होता तो ट्रांसपोर्टिंग लागत में बड़ी बचत संभव थी और बिजली दरों में वृद्धि से बचा जा सकता था। विवाद इस बात को लेकर भी है कि टेंडर पास करने वाली समिति में निजी खनन कंपनी के दो सदस्य शामिल हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। पिछली बार भी इसी तरह गुजरात की एक कंपनी को टेंडर दे दिया गया था।

खदानों से कोयला निकालकर प्लांट तक पहुंचाने का खर्च बिजली कंपनी वहन करती है। इसे ट्रांसपोर्टिंग कंपनी को ठेका देकर किया जाता है, लेकिन यह खर्च अंततः बिजली उपभोक्ताओं पर ही डाल दिया जाता है। यानी ट्रांसपोर्टिंग का खर्च बिजली बिल में शामिल होकर वसूला जाता है।

राज्य बिजली जनरेशन कंपनी के एमडी संजीव कुमार कटियार ने बताया कि टेंडर आमंत्रित किया गया था, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों के कारण इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही टेंडर खोला जाएगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता सुनिश्चित करने और कोयला आपूर्ति में किसी तरह की शिकायत न आए, इसलिए खनन कंपनी के प्रतिनिधियों को प्रक्रिया में शामिल किया जाता है।

इस विवाद और देरी ने बिजली उपभोक्ताओं और उद्योग जगत में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित किए बिना ऐसे टेंडर की पुनरावृत्ति लागत और समय दोनों की बर्बादी कर सकती है।

उपभोक्ताओं और ट्रांसपोर्टरों की नजर अब टेंडर के खुलने और निष्पक्ष निर्णय पर टिकी हुई है।

Show More
Follow Us on Our Social Media
Back to top button
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई
जम्मू-कश्मीर में बारिश से अपडेट सोनम ने ही राजा को दिया था खाई में धक्का… आरोपियों ने बताई सच्चाई