Tata consultancy service में हर घंटे 9 कर्मचारियों की छंटनी, 3 महीने में 20 हजार लोगों को दिखाया बाहर का रास्ता

आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी (TCS) में छंटनी का मामला तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। कंपनी के तिमाही नतीजों के बाद जारी फैक्टशीट में सामने आया है कि बीते तीन महीनों में लगभग 20 हजार कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि कंपनी ने हर घंटे औसतन 9 कर्मचारियों को बाहर किया है।
कंपनी ने निवेशकों को दिए बयान में कहा है कि केवल 1 फीसदी यानी करीब 6 हजार कर्मचारियों को ही रीस्ट्रक्चर के तहत हटाया गया है। हालांकि, कर्मचारियों के संगठन (NITES) ने कंपनी पर वास्तविक आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है और दावा किया है कि वास्तविक छंटनी की संख्या 19,755 है।
वर्कफोर्स में भारी गिरावट:
टीसीएस की वेबसाइट पर वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के अनुसार, कर्मचारियों की संख्या जून तिमाही में 6,13,069 थी जो सितंबर तिमाही में घटकर 5,93,314 रह गई। यानी एक तिमाही में ही करीब 20 हजार कर्मचारियों की कमी हुई। कंपनी ने जुलाई में ही अपने वैश्विक कार्यबल में 2 फीसदी यानी 12,261 कर्मचारियों की छंटनी की योजना की घोषणा की थी।
कंपनी की सफाई और संगठन का विरोध:
कंपनी के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी सुदीप कुन्नुमल ने कहा कि जिन कर्मचारियों को हटाया गया है, वे मुख्यतः मिड और सीनियर लेवल के थे और जिनके कौशल कंपनी की जरूरतों से मेल नहीं खाते थे। उन्होंने यह भी बताया कि प्रभावित कर्मचारियों को नौकरी बदलने और रिटायरमेंट लाभ दिए जा रहे हैं।
वहीं एनआईटीईएस का कहना है कि कंपनी की वेबसाइट और वित्तीय खुलासों में बड़ा अंतर है। संगठन ने आरोप लगाया कि कंपनी ने जानबूझकर वास्तविक छंटनी के आंकड़ों को कम दिखाया है ताकि नियामकों और जनता को गुमराह किया जा सके।
कर्मचारियों में नाराजगी:
संगठन के अध्यक्ष हरप्रीत सिंह सलूजा ने कहा कि यह कोई रीस्ट्रक्चर नहीं बल्कि कंपनी की “क्रूरता” है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन कर्मचारियों ने 10 से 15 साल तक कंपनी में सेवा दी, उन्हें अचानक बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। सलूजा ने कहा, “टीसीएस ने लोगों के बजाय मुनाफे को चुना है… उसी कार्यबल को धोखा दिया है जिसने कंपनी का साम्राज्य खड़ा किया था।”
इस बड़े पैमाने पर हुई छंटनी से आईटी सेक्टर के कर्मचारियों में भी चिंता का माहौल है। संगठन ने सरकार और नियामकों से कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।





