रिंग ऑफ फायर में हर दिन आते हैं 60 भूकंप, फिलीपींस में 6.9 तीव्रता से मचा कोहराम

फिलीपींस में मंगलवार को 6.9 तीव्रता का जोरदार भूकंप आया, जिसने तबाही मचाई। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक 69 लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं। इससे पहले रूस में भी भूकंप दर्ज किया गया था। लगातार आ रहे झटकों ने रिंग ऑफ फायर में स्थित देशों की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में इस इलाके में 21,700 भूकंप दर्ज हुए हैं, यानी औसतन रोज 60 झटके। इनमें से 97 भूकंप की तीव्रता 6.0 से ज्यादा रही।
विशेषज्ञ बताते हैं कि रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर को घेरे एक ज्वालामुखीय और भूकंपीय पट्टी है, जिसकी लंबाई लगभग 40 हजार किलोमीटर है। इसे पैसिफिक बेल्ट भी कहा जाता है। दुनिया के करीब 75 प्रतिशत सक्रिय ज्वालामुखी इसी क्षेत्र में हैं। यहां करीब 10 टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं, जिनमें कैरिबियन प्लेट, नॉर्थ और साउथ अमेरिकन प्लेट, नाज्का प्लेट, कोकोस प्लेट, ज्वान डी फुका प्लेट और ओखोट्स्क प्लेट प्रमुख हैं।
इन टेक्टोनिक प्लेट्स के लगातार खिसकने और टकराने से भूकंप के झटके बार-बार महसूस होते हैं। यही वजह है कि दुनिया के 90 प्रतिशत भूकंप इसी इलाके में दर्ज किए जाते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस क्षेत्र के 36 देश या आइसलैंड रिंग ऑफ फायर की जद में आते हैं, जिनमें रूस, जापान, अमेरिका, मेक्सिको, कनाडा, ग्वाटेमाला और फिलीपींस शामिल हैं।
इतिहास पर नज़र डालें तो साल 1906 में पहली बार अलेक्जेंडर पी. लिविंगस्टन ने दुनिया को रिंग ऑफ फायर के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भूकंप दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक है। साल 1998 से 2017 के बीच भूकंप से विश्वभर में लगभग 7.5 लाख लोगों की जान गई, यानी हर साल औसतन 40 हजार मौतें।
फिलीपींस में आए हालिया भूकंप ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि रिंग ऑफ फायर पर बसे देश हमेशा भूकंपीय खतरे की जद में हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर आपदा प्रबंधन और चेतावनी तंत्र को मजबूत कर ही इन तबाहीकारी प्रभावों को कम किया जा सकता है।





