बस्तर दशहरा: काछनगादी की रस्म पूरी, 10 साल की पीहू दास पर सवार हुईं काछन देवी

बस्तर। बस्तर दशहरा की सबसे अहम रस्म काछनगादी रविवार शाम निभाई गई। इस मौके पर 10 साल की बालिका पीहू दास पर काछन देवी सवार हुईं और परंपरा अनुसार बस्तर राजपरिवार को दशहरा मनाने की अनुमति दी।

यह रस्म जगदलपुर के भंगाराम चौक स्थित काछनगुड़ी में हुई। यहां बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद भंजदेव सहित अन्य लोग मौजूद रहे। काछन देवी ने पीहू दास पर सवार होकर बेल के कांटों से बने झूले पर झूलते हुए कमलचंद भंजदेव को फूल भेंट किए और दशहरा पर्व निर्विघ्न संपन्न होने का आशीर्वाद दिया।

करीब 617 साल पुरानी इस परंपरा के बारे में कमलचंद भंजदेव ने बताया कि काछन और रैला माता राजघराने की बेटियां थीं, जिन्होंने आत्म बलिदान दिया था। तभी से उनकी आत्माएं यहां पूजित हैं और हर साल पितृ पक्ष के आखिरी दिन यह रस्म निभाई जाती है।

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