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चुनाव आयोग ने 808 निष्क्रिय दलों को सूची से हटाया, बिहार के 14 दल भी शामिल

भारत के चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 808 निष्क्रिय पार्टियों को अपनी सूची से बाहर कर दिया है। इनमें बिहार के 14 दल भी शामिल हैं। आयोग का कहना है कि ये दल पिछले छह सालों से न तो कोई चुनाव लड़ रहे थे और न ही नियमों का पालन कर रहे थे। इस कदम को चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

आयोग के मुताबिक, 18 सितंबर को 474 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को सूची से हटा दिया गया। इससे पहले 9 अगस्त को 334 दलों पर कार्रवाई हुई थी। इस तरह कुल 808 दल बाहर हो गए। कार्रवाई के बाद देशभर में गैर-मान्यता प्राप्त दलों की संख्या घटकर 2,046 रह गई है, जबकि 6 राष्ट्रीय और 67 राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त दल अभी सक्रिय हैं।

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। हटाए गए 14 दल अब चुनाव मैदान में अपने उम्मीदवार नहीं उतार पाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि कई दल चुनाव नहीं लड़ रहे थे और अपने सालाना खातों तथा चुनावी खर्च की रिपोर्ट भी जमा नहीं कर रहे थे। वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक 359 दलों ने न तो ऑडिटेड अकाउंट्स जमा किए और न ही खर्च का ब्यौरा पेश किया।

चुनाव आयोग का मानना है कि निष्क्रिय या संदिग्ध दलों को हटाना जरूरी है क्योंकि कई बार ऐसे दल इनकम टैक्स और मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों का उल्लंघन करते पाए गए हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29ए के तहत रजिस्टर्ड दलों को टैक्स छूट जैसी सुविधाएं मिलती हैं, इसलिए केवल सक्रिय दलों को सूची में बनाए रखना आवश्यक है।

हालांकि, हटाए गए दलों को भविष्य में फिर से पंजीकरण कराने का विकल्प खुला रहेगा। आयोग का यह कदम साफ करता है कि चुनावी व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।

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