कर्नाटक की मालूर सीट पर फिर गिनती होगी, कांग्रेस को झटका

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। हाई कोर्ट ने कोलार जिले की मालूर विधानसभा सीट पर वोटों की दोबारा गिनती कराने का आदेश दिया है। यह सीट 2023 के चुनाव में कांग्रेस ने बेहद कम अंतर से जीती थी। कांग्रेस उम्मीदवार केवाई नानजे गौड़ा ने बीजेपी प्रत्याशी मंजूनाथ गौड़ा को सिर्फ 248 वोटों से हराया था। नतीजों को मंजूनाथ गौड़ा ने अदालत में चुनौती दी थी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि मतगणना के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ। मंजूनाथ का कहना था कि रिटर्निंग ऑफिसर और टीम ने चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 66ए का पालन नहीं किया और मतगणना एजेंटों के हस्ताक्षर ईवीएम खोले जाने से पहले ही ले लिए गए। उन्होंने पुनर्गणना और चुनाव से जुड़ी पूरी सामग्री अदालत के सामने पेश करने की मांग की थी। कोर्ट ने माना कि अगर मतगणना की वीडियोग्राफी उपलब्ध कराई जाती, तो आरोपों की पुष्टि करना आसान होता। अदालत ने अपने आदेश पर 30 दिनों की रोक लगाई है ताकि कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सके।

मालूर सीट का सियासी इतिहास दिलचस्प रहा है। यहां 2008 में बीजेपी के कृष्णैया शेट्टी जीते थे, जबकि 2013 में जेडीएस के मंजूनाथ गौड़ा ने बाजी मारी। 2018 और 2023 में कांग्रेस ने कब्जा जमाया और नानजे गौड़ा ने जीत हासिल की। इस बार उनकी जीत बेहद मामूली अंतर से रही थी।

मतदाताओं की संरचना पर नजर डालें तो इस क्षेत्र में करीब 46 हजार से ज्यादा एससी और 17 हजार से ज्यादा एसटी वोटर हैं। यही वजह है कि हर चुनाव में समीकरण बदलते रहे हैं। वोट शेयर की बात करें तो 2008 में बीजेपी को 65.83 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि 2018 में कांग्रेस 46.9 प्रतिशत वोट पाकर आगे रही। 2023 में कांग्रेस और बीजेपी का वोट शेयर लगभग बराबर रहा, कांग्रेस को 29.4 प्रतिशत और बीजेपी को 29.3 प्रतिशत।

अब कोर्ट के फैसले के बाद फिर से वोटों की गिनती होगी। ऐसे में मालूर सीट पर किसका सिक्का चलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

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