उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस-वोटिंग विवाद, TMC का आरोप- सांसद खरीदे, BJP बोली- गठबंधन टूटा

दिल्ली। उपराष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस-वोटिंग को लेकर राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और TMC सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा ने विपक्षी सांसदों को 15-20 करोड़ रुपये देकर खरीदा। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. के भीतर मतभेद और फूट का नतीजा है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के कुछ सांसदों ने “अंतरात्मा की आवाज” पर NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को वोट दिया।
चुनाव में 788 में से 767 सांसदों ने वोट डाले। राधाकृष्णन को 452 वोट और विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले, जबकि 15 वोट अमान्य रहे। NDA के पास केवल 427 सांसद थे और वाईएसआर कांग्रेस के 11 सांसदों के समर्थन से यह संख्या 438 बनती थी। बावजूद इसके, राधाकृष्णन को 14 अतिरिक्त वोट मिले, जिससे क्रॉस-वोटिंग की अटकलें तेज हो गईं। भाजपा का कहना है कि कम से कम 15 विपक्षी सांसदों ने NDA को वोट दिया और कुछ ने जानबूझकर अमान्य वोट डाले।
इस विवाद पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि अगर क्रॉस-वोटिंग हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। RJD नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी के सभी सांसदों ने विपक्षी उम्मीदवार को वोट दिया। NCP की सुप्रिया सुले ने सवाल किया कि गुप्त मतदान में भाजपा को कैसे पता चला कि किसने किसे वोट दिया। शिवसेना (उद्धव गुट) के अरविंद सावंत ने भाजपा पर सांसदों को ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया। उपराष्ट्रपति चुनाव गुप्त मतदान से होता है और इसमें पार्टी व्हिप लागू नहीं होता। यही कारण है कि विपक्षी दलों के भीतर क्रॉस-वोटिंग का मुद्दा गंभीर राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।





