GST हटेगा लेकिन बीमा नहीं होगा सस्ता, प्रीमियम 5% तक बढ़ने का खतरा

Gst काउंसिल ने हाल ही में स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसियों पर 18% टैक्स हटाने का बड़ा फैसला लिया है। यह नियम 22 सितंबर 2025 से लागू होगा। माना जा रहा था कि इस कदम से बीमा पॉलिसियों की प्रीमियम दरें घटेंगी और लोगों को राहत मिलेगी। लेकिन कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज रिसर्च की एक रिपोर्ट ने साफ किया है कि ग्राहकों को इस फैसले से फायदा नहीं मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार, बीमा कंपनियों को अब इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि जीएसटी हटने के बाद वे इसका दावा नहीं कर पाएंगी। अभी तक कंपनियां एजेंट कमीशन, विज्ञापन और पुनर्बीमा जैसी लागतों पर ITC का फायदा लेती थीं। अब यह राहत खत्म होने से उनका खर्च बढ़ेगा और इस नुकसान की भरपाई के लिए वे प्रीमियम दरों में 3 से 5% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी हटने से बीमा कंपनियों की लागत 12-15% तक कम हो सकती है, लेकिन इसका सीधा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचेगा। उल्टा, कंपनियां ITC न मिलने से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रीमियम महंगा करेंगी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पुनर्बीमा सेवाओं को भी टैक्स से छूट दी जाएगी, लेकिन बीमा कंपनियों को बाकी कई सेवाओं पर जीएसटी चुकाना ही पड़ेगा। ऐसे में टैक्स राहत अधूरी रहेगी और बीमा कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डालेंगी।
कुल मिलाकर, यह फैसला देखने में राहत देने वाला है, लेकिन हकीकत में आम लोगों को सस्ता बीमा नहीं मिलेगा। बल्कि उन्हें आने वाले समय में महंगे प्रीमियम का झटका झेलना पड़ सकता है।





