जापान का असली खजाना: समुद्र, जंगल और ऊर्जा संसाधनों से चलती है अर्थव्यवस्था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों जापान के दौरे पर हैं। जापान को तकनीक, ऑटोमोबाइल और स्टील उद्योग के लिए जाना जाता है, लेकिन इसके अलावा इस देश के पास ऐसे प्राकृतिक संसाधन भी हैं, जो इसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं। दुनिया में जापान की पहचान केवल टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असली खजाना समुद्र, जंगल और जियोथर्मल ऊर्जा से जुड़ा हुआ है।
जापान ब्लू इकोनॉमी यानी समुद्र से होने वाली कमाई में काफी आगे है। यह दुनिया के उन देशों में शामिल है जो सबसे ज्यादा मछलियां पकड़कर निर्यात करते हैं। यहां का मछली उद्योग घरेलू खपत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतें भी पूरी करता है। साल 2022 में जापान ने करीब 3.85 मिलियन मीट्रिक टन मछली पकड़ी। टूना, येलोटेल, मैकेरल और झींगे जैसे सी-फूड उत्पाद अमेरिका और चीन जैसे देशों में बड़े पैमाने पर भेजे जाते हैं।
समुद्र के अलावा जापान के पास घने जंगल भी उसकी दौलत हैं। देश का लगभग 67 प्रतिशत हिस्सा वनों से ढका हुआ है। लकड़ी और बांस से बनने वाले उत्पाद, फर्नीचर और कागज उद्योग जापान की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। जापान इन उत्पादों का निर्यात चीन, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देशों को करता है।
जापान की एक और बड़ी ताकत है जियोथर्मल एनर्जी। यह देश ‘रिंग ऑफ फायर’ पर स्थित है, जहां ज्वालामुखी और हॉट स्प्रिंग्स की भरमार है। इनसे निकलने वाली ऊर्जा का इस्तेमाल बिजली उत्पादन और हीटिंग के लिए किया जाता है। जापान दुनिया के उन शीर्ष देशों में है जिनके पास सबसे ज्यादा भू-तापीय ऊर्जा संसाधन मौजूद हैं।
कुल मिलाकर, जापान की असली संपत्ति केवल उसकी टेक्नोलॉजी नहीं बल्कि प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी वह दौलत है, जिसने उसे आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। पीएम मोदी की यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और जापान अपनी साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने की दिशा में बढ़ रहे हैं।





