देश में पहली बार शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ पार, लेकिन कई स्कूलों में समस्याएं बरकरार

दिल्ली। देश में पहली बार किसी शैक्षणिक सत्र में शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ से अधिक हो गई है। यूडाइस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अब कुल 1 करोड़ 1 लाख 22 हजार 420 शिक्षक हैं। इनमें से 51% यानी 51.47 लाख सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं। हालांकि, देशभर में 1,04,125 स्कूल ऐसे भी हैं, जिनमें सिर्फ एक ही शिक्षक है। वहीं, 7,993 स्कूलों में एक भी छात्र नामांकित नहीं है।
रिपोर्ट बताती है कि महिला शिक्षकों की संख्या पिछले दशक में तेजी से बढ़ी है। 2014-15 में 40.16 लाख महिला शिक्षक थीं, जो अब बढ़कर 54.81 लाख हो गई हैं। इस दौरान हुई 51.36 लाख नई भर्तियों में से 61% महिलाएं थीं। वहीं, पुरुष शिक्षकों की संख्या लगभग स्थिर रही और अब 46.41 लाख है।
स्टूडेंट-टीचर रेश्यो में भी सुधार हुआ है। दस साल पहले मिडिल स्तर पर एक शिक्षक 26 छात्रों को पढ़ाता था, जो अब घटकर 17 रह गया है। सेकंडरी स्तर पर यह रेश्यो 31 से घटकर 21 हो गया है। इससे छात्रों को ज्यादा व्यक्तिगत ध्यान मिल रहा है। ड्रॉपआउट रेट भी घटी है—सेकंडरी स्तर पर यह 10.9% से घटकर 8.2%, मिडिल स्तर पर 5.2% से घटकर 3.5% और प्राथमिक स्तर पर 3.7% से घटकर 2.3% हो गया है।
हालांकि, राज्यों में असमानता बनी हुई है। झारखंड में एक शिक्षक पर औसतन 47 छात्र हैं, जबकि सिक्किम में केवल 7। प्राथमिक स्तर पर सबसे ज्यादा स्कूल पश्चिम बंगाल (80%) में हैं, जबकि चंडीगढ़ में केवल 3%। चंडीगढ़ में प्रति स्कूल 1,222 छात्र हैं, जबकि लद्दाख में यह संख्या सिर्फ 59 है।





