नेपाल बॉर्डर क्यों बनता है पाक आतंकियों के लिए आसान रास्ता?

पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी उस्मान, हसनैन अली और आदिल हुसैन नेपाल के रास्ते बिहार में घुसे हैं। इस घुसपैठ को लेकर बिहार पुलिस मुख्यालय ने अलर्ट जारी किया है। यह पहला मामला नहीं है, जब पाकिस्तान के आतंकी नेपाल सीमा से भारत में दाखिल हुए हों। 2013 से अब तक कई बड़े आतंकी नेपाल बॉर्डर से पकड़े जा चुके हैं।
भारत और नेपाल की 1751 किमी लंबी सीमा पूरी तरह खुली है। इस पर कड़ी घेराबंदी नहीं है, सिर्फ सीमित चेक पोस्ट और कस्टम अधिकारी मौजूद रहते हैं। दोनों देशों के बीच बेटी-रोटी के रिश्ते और व्यापारिक गतिविधियों के कारण यहां आवाजाही बेहद आसान है। आतंकी इन्हीं स्थितियों का फायदा उठाते हैं।
नेपाल का पाकिस्तान से सीधा कूटनीतिक संपर्क और वहां आसानी से टूरिस्ट वीजा मिलना भी आतंकियों के लिए मददगार साबित होता है। नेपाल पहुंचने के बाद वे स्थानीय पासपोर्ट तक बनवा लेते हैं, जिससे भारत में प्रवेश करना और भी सहज हो जाता है। तस्करी नेटवर्क भी इस रूट को खतरनाक बनाता है। शराब, ड्रग्स और अन्य सामान की तस्करी में सक्रिय गिरोह आतंकियों की मदद करते हैं।
कई बार इसी रास्ते से बड़े हमले की साजिश रची गई। 1999 में काठमांडू से दिल्ली आ रहे विमान का अपहरण यहीं से हुआ था। यासीन भटकल जैसे आतंकी भी नेपाल बॉर्डर से पकड़े गए। लगातार ऐसे मामलों के सामने आने से यह सवाल और गहरा हो गया है कि आखिर नेपाल सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कब ठोस कदम उठाए जाएंगे।





