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EC के आरोप को महागठबंधन ने बनाया चुनावी हथियार, NDA नेताओं पर निशाना तेज

पटना:बिहार विधानसभा चुनाव में विकास, रोजगार और जातीय समीकरणों की जगह अब वोट चोरी का मुद्दा सियासी बहस के केंद्र में है। इसकी शुरुआत तब हुई जब आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा कि नाम हटाया नहीं गया बल्कि मतदान केंद्र बदला गया है, साथ ही उन पर दो वोटर आईडी कार्ड रखने का आरोप लगाया।

चुनाव आयोग के इस आरोप के बाद तेजस्वी ने इसे NDA के खिलाफ बड़ा राजनीतिक हथियार बना लिया। उन्होंने दावा किया कि डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के पास भी दो EPIC नंबर हैं और दोनों कार्डों में उनकी उम्र अलग-अलग दर्ज है। इसी तरह, तेजस्वी ने मुजफ्फरपुर की मेयर निर्मला देवी, उनके परिजनों और NDA सांसद वीणा देवी पर भी दो-दो वोटर कार्ड रखने के आरोप लगाए।

तेजस्वी का कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं बल्कि व्यापक फर्जीवाड़े का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई NDA नेताओं ने अलग-अलग विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों में वोटर कार्ड बनवा रखे हैं, जिससे दोहरी वोटिंग की संभावना है। उन्होंने इसे चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच मिलीभगत करार दिया।

इस मुद्दे पर कांग्रेस भी तेजस्वी के साथ खड़ी है। राहुल गांधी ने बिहार के अलावा कर्नाटक और केरल में भी फर्जी वोट मिलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केरल की त्रिशूर सीट पर एक महिला के घर से 9 फर्जी वोट बरामद हुए, और यह सीट बीजेपी ने जीती थी।

महागठबंधन का मकसद इस विवाद को चुनाव तक जिंदा रखना है, ताकि NDA को लगातार रक्षात्मक स्थिति में रखा जा सके। अब देखना यह है कि क्या जनता इस आरोप को चुनावी मुद्दा मानकर महागठबंधन के साथ खड़ी होती है, या इसे महज राजनीतिक बयानबाजी समझकर नजरअंदाज कर देती है। नतीजे ही तय करेंगे कि यह आरोप किसके लिए वरदान और किसके लिए अभिशाप साबित होगा।

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