छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टी व्यवस्था में बड़ा बदलाव, लगातार 3 साल अनुपस्थित रहने पर माना जाएगा इस्तीफा

रायपुर। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के चार लाख से अधिक सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अवकाश संबंधी नियमों में बड़ा बदलाव किया है।

नए नियमों के तहत, यदि कोई कर्मचारी लगातार तीन वर्ष तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो इसे स्वतः इस्तीफा मान लिया जाएगा। ऐसे कर्मचारी को पुनः कार्य पर लौटने के लिए राज्यपाल की अनुमति लेनी होगी। पहले यह सीमा पांच साल थी, जिसे अब घटाकर तीन साल कर दिया गया है।

बिना अनुमति 30 दिन से अधिक छुट्टी लेने पर अब विभागीय कार्रवाई के साथ दंड का भी प्रावधान है। अर्धवेतन अवकाश को अब सीमित किया गया है और बिना मेडिकल सर्टिफिकेट के पूरे सेवाकाल में अधिकतम 180 दिन ही स्वीकृत होंगे।

महिला कर्मचारियों के लिए संतान पालन अवकाश की सीमा पूरे सेवाकाल में 730 दिन तय की गई है। यह अवकाश एक कैलेंडर वर्ष में तीन बार से अधिक नहीं लिया जा सकेगा। अर्जित अवकाश की अधिकतम सीमा 300 दिन होगी, जिसमें एक बार में 180 दिन से अधिक अवकाश लेने पर मामला वित्त विभाग को भेजना होगा।

सचिव मुकेश कुमार बंसल ने स्पष्ट किया है कि यह नियम न्यायालयों की व्यवस्था पर लागू नहीं होंगे। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर अवकाश मामलों की समीक्षा करें ताकि सेवानिवृत्ति के समय कोई विसंगति न हो। इसके अलावा, प्रसूति अवकाश, अदेय अवकाश और मृत्यु या बीमारी के मामलों में विशेष प्रावधान भी किए गए हैं। मंत्रिपरिषद को राज्यपाल की ओर से निर्णय लेने की शक्ति दी गई है।

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